US Diego Garcia speculation: ग्रीनलैंड के बाद डिएगो गार्सिया पर अमेरिका की नजर? ट्रंप के बयान से बढ़ी हलचल, भारत को मिल सकता है रणनीतिक फायदा

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US Diego Garcia speculation

वॉशिंगटन, एजेंसियां। ग्रीनलैंड के बाद अब अमेरिका की नजर डिएगो गार्सिया द्वीप पर होने की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का सहयोगी United Kingdom डिएगो गार्सिया को Mauritius को सौंपने की योजना बना रहा है, जो “बिना वजह” और “गलत फैसला” होगा। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप की नजर इस रणनीतिक द्वीप पर है।

क्या है डिएगो गार्सिया और क्यों है अहम?

डिएगो गार्सिया, चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यहां अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा है, जिसे हिंद महासागर क्षेत्र में सबसे अहम सैन्य ठिकानों में गिना जाता है। यह बेस मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान और इराक जैसे युद्ध अभियानों में अमेरिका के लिए अहम भूमिका निभा चुका है।

UK–Mauritius समझौता और विवाद

अक्टूबर 2024 में ब्रिटेन ने घोषणा की थी कि वह चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपेगा, हालांकि डिएगो गार्सिया पर 99 साल तक सैन्य बेस चलाने की अनुमति बनी रहेगी। इसी फैसले की ट्रंप ने आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीन की क्षेत्रीय मौजूदगी बढ़ सकती है, जिसे अमेरिका स्वीकार नहीं करना चाहता।

भारत का रुख क्या रहा है?

भारत ने लगातार चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के दावे का समर्थन किया है। 2019 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में मॉरीशस के पक्ष में वोट दिया था।
साथ ही भारत और मॉरीशस के रिश्ते हाल के वर्षों में और मजबूत हुए हैं, खासकर हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच।

अमेरिका कब्जा करता है तो भारत को कैसे फायदा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अमेरिका डिएगो गार्सिया पर अपना नियंत्रण और मजबूत करता है तो इसका रणनीतिक फायदा भारत को भी मिल सकता है। हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी आसान होगी। भारत–अमेरिका रक्षा सहयोग को मजबूती मिलेगी। किसी बड़े क्षेत्रीय तनाव की स्थिति में भारत को अमेरिकी सैन्य समर्थन जल्दी मिल सकता है। डिएगो गार्सिया से चीन के लिए अहम मलक्का स्ट्रेट पर भी नजर रखी जा सकती है, जो वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग है।

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