Lebanon US‑Iran conflict statement
बेरुत, एजेंसियां। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान को लेकर लेबनान से बड़ा बयान सामने आया है। लेबनान के सुप्रीम इस्लामिक शिया काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान की राजधानी तेहरान पर हमला करता है, तो लेबनान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली ईरान के साथ मजबूती से खड़ा होगा। इस संबंध में लेबनान के शिया नेतृत्व ने एक वीडियो बयान जारी कर अपना रुख सार्वजनिक किया है।
खामेनेई पर हमला, शिया समुदाय पर हमला
लेबनान के सुप्रीम इस्लामिक शिया काउंसिल के उपाध्यक्ष शेख अली अल-खतीब ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को नुकसान पहुंचाना केवल ईरान पर हमला नहीं होगा, बल्कि इसे पूरी शिया उम्माह के खिलाफ युद्ध माना जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि खामेनेई के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई शिया समुदाय की धार्मिक और राजनीतिक अस्मिता पर सीधा हमला होगी।
बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच बयान
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है। इजरायल और ईरान समर्थित गुटों के बीच जारी संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में लेबनान के शिया नेतृत्व का यह बयान क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
ईरान के समर्थन में लेबनान की शिया एकजुटता
लेबनान की सुप्रीम इस्लामिक शिया काउंसिल देश की शिया आबादी की आधिकारिक संस्था है, जिसकी स्थापना 1969 में इमाम मूसा सद्र ने की थी। यह संस्था धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मामलों में शिया समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है। काउंसिल के हिजबुल्लाह जैसे ईरान समर्थक संगठनों से भी करीबी संबंध हैं, जो तेहरान के “प्रतिरोध अक्ष” का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
विलायत-ए-फकीह का प्रतीक हैं खामेनेई
शिया इस्लाम में अयातुल्ला खामेनेई को ‘विलायत-ए-फकीह’ यानी इस्लामी न्यायविद की संरक्षकता का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। लेबनान के शिया नेतृत्व का यह रुख दिखाता है कि ईरान के साथ वैचारिक और राजनीतिक प्रतिबद्धता अडिग है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयानों से लेबनान के आंतरिक सांप्रदायिक संतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।
