Jharkhand workers Dubai: दुबई में फंसे झारखंड के 14 मजदूर, सरकार से वतन वापसी की लगा रहे गुहार

3 Min Read

Jharkhand workers Dubai

रांची। झारखंड के प्रवासी मजदूर एक बार फिर विदेश में फंसने को मजबूर हैं। गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों के 14 मजदूर इस समय दुबई में फंसे हुए हैं। आरोप है कि संबंधित कंपनी द्वारा उनसे तय समय से अधिक काम कराया जा रहा है, लेकिन इसके बदले पिछले तीन महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। इससे मजदूरों के सामने रहने और खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

मजदूरों ने वीडियो के माध्यम से अपनी पीड़ा साझा की

दुबई में फंसे मजदूरों ने एक वीडियो के माध्यम से अपनी पीड़ा साझा करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से मदद की अपील की है। यह वीडियो प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली को भेजा गया, जिसे उन्होंने मीडिया के साथ साझा किया है।

राज्य सरकार से वतन वापसी की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि मजदूरों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए ठोस कूटनीतिक पहल की जाए। उन्होंने कहा कि विदेशों में फंसने वाले प्रवासी मजदूरों के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ज्यादा कमाई के लालच में कई मजदूर विदेश जाते हैं और बाद में शोषण का शिकार हो जाते हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं थम नहीं रही हैं।

किन-किन जिलों के हैं मजदूर

दुबई में फंसे मजदूरों में गिरिडीह जिले के सरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत चिचाकी निवासी रोशन कुमार और अजय कुमार, बगोदर थाना क्षेत्र के तिरला निवासी राजेश महतो और मंडरो, डुमरडेली निवासी अजय कुमार शामिल हैं। बोकारो जिले के पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र के कंजकीरो निवासी डालेश्वर महतो तथा हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के खेदाडीह निवासी जागेश्वर महतो और फालेन्द्र महतो, सिरैय निवासी बैजनाथ महतो, पारजोरिया निवासी दिलीप महतो, गंगाधर महतो और त्रिलोकी महतो, चकचुको बसरिया निवासी दीपक कुमार, गोरहर थाना क्षेत्र के गोरहर निवासी रोहित महतो और सेवा महतो भी इसमें शामिल हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मधगोपाली पंचायत (दूधपनिया गांव) निवासी प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की 23 अक्टूबर 2025 को सऊदी अरब में मौत हो गई थी। घटना के तीन महीने बाद भी उनका शव भारत नहीं लाया जा सका है और न ही परिजनों को कोई मुआवजा मिला है। बताया गया है कि ये सभी मजदूर अक्टूबर 2025 में ईएमसी कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन के काम के लिए दुबई गए थे, लेकिन बीते तीन महीनों से उन्हें नियमित वेतन नहीं मिल रहा है। आर्थिक तंगी के चलते मजदूरों के सामने गंभीर हालात बन गए हैं और वे सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

Share This Article
Exit mobile version