Sajjan Kumar: 1984 सिख दंगे के मुख्य आरोपी सज्जन कुमार बरी, पीड़ित परिवारों में नाराजगी

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Sajjan Kumar

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी और विकासपुरी मामलों में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया। यह फैसला स्पेशल जज डिग विनय सिंह ने सुनाया। हालांकि अदालत की ओर से अभी विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश जारी किया जाना बाकी है। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवारों में गहरा आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है।

पीड़ित परिवार बोले— हमें इंसाफ नहीं मिला

फैसले के बाद पीड़ित परिवारों ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला है और वे इस निर्णय के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करेंगे। एक पीड़ित परिजन ने भावुक होते हुए कहा कि उनके परिवार के कई सदस्यों की दंगों में हत्या कर दी गई थी और वे पिछले 40 वर्षों से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके घावों को और गहरा कर गया है।

वकील ने फैसले का किया स्वागत

सज्जन कुमार के वकील अनिल कुमार शर्मा ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जनकपुरी और विकासपुरी मामलों में उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि कुमार को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया और घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी साबित नहीं हो पाई। बचाव पक्ष का दावा है कि वर्षों बाद गवाहों के बयान सामने आए, जो विश्वसनीय नहीं थे।

क्या है मामला

यह मामला स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा दर्ज की गई दो FIR से जुड़ा है। पहली FIR जनकपुरी में 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित है, जबकि दूसरी FIR विकासपुरी में 2 नवंबर 1984 को गुरचरण सिंह की हत्या से जुड़ी है। अगस्त 2023 में अदालत ने सज्जन कुमार पर दंगा भड़काने और दुश्मनी फैलाने के आरोप तय किए थे, लेकिन हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों से उन्हें पहले ही बरी कर दिया गया था।

जेल में ही रहेंगे सज्जन कुमार

हालांकि इस मामले में बरी होने के बावजूद सज्जन कुमार को जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। वे सरस्वती विहार दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, जिसमें 1984 में जसवंत सिंह और उनके बेटे की हत्या का दोष उन पर सिद्ध हुआ था।

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