How horses smell fear: विज्ञान का बड़ा खुलासा: क्या घोड़े सूंघ सकते हैं आपका डर? रिसर्च में हुई पुष्टि

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How horses smell fear

नई दिल्ली/पीसा (इटली): इंसान और घोड़ों का रिश्ता सदियों पुराना है। हम अक्सर कहते हैं कि जानवर हमारी भावनाओं को समझते हैं। अब वैज्ञानिकों ने इस पर मुहर लगा दी है। एक नई रिसर्च में यह साबित हुआ है कि घोड़े इंसान के पसीने की गंध से उसका डर पहचान सकते हैं। यह खोज Equine Psychology (अश्व मनोविज्ञान) के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। अश्व मनोविज्ञान घोड़ों के व्यवहार और उनकी मानसिक स्थिति का गहराई से अध्ययन करता है।

पसीने की गंध और रासायनिक संवाद

जब इंसान डरता है, तो उसके शरीर में कई रासायनिक बदलाव होते हैं। हमारा शरीर पसीने के माध्यम से कुछ खास Chemosignals (कीमोसिग्नल्स) छोड़ता है। ये कीमोसिग्नल्स पसीने के माध्यम से निकलने वाले रासायनिक संकेत हैं। ये संकेत हमारी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। इंसान इन संकेतों को सूंघकर नहीं पहचान पाते।

लेकिन घोड़ों के पास एक कमाल की Olfactory System (घ्राण प्रणाली) होती है। घ्राण प्रणाली नाक और मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो गंध को पहचानने का काम करता है। घोड़ों की यह प्रणाली इंसानों से कहीं अधिक विकसित होती है। वे हवा में मौजूद सूक्ष्म रसायनों को तुरंत पकड़ लेते हैं। वे जान जाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति घबराया हुआ है।

इटली की पीसा यूनिवर्सिटी की बड़ी रिसर्च

इटली की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ पीसा ने इस पर शोध किया। वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या घोड़े वास्तव में भावनाओं को अलग कर सकते हैं। शोध के दौरान पाया गया कि जब इंसान तनाव में होता है, तो उसके शरीर में Cortisol (कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ जाता है। कोर्टिसोल को ‘स्ट्रेस हार्मोन’ कहा जाता है। यह डर या घबराहट के समय पसीने के साथ बाहर आता है।

रिसर्च की प्रक्रिया:

  1. वैज्ञानिकों ने स्वयंसेवकों को डरावनी और खुशहाल फिल्में दिखाईं।
  2. उनके पसीने के नमूनों को इकट्ठा किया गया।
  3. इन नमूनों को अलग-अलग घोड़ों को सुंघाया गया।

पार्श्वीकरण और घोड़ों का व्यवहार

रिसर्च में घोड़ों के व्यवहार में एक खास पैटर्न देखा गया। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में Lateralization (पार्श्वीकरण) कहते हैं। पार्श्वीकरण का अर्थ है मस्तिष्क के दाएं और बाएं हिस्से का अलग-अलग कार्यों के लिए उपयोग होना।

जब घोड़ों ने डर वाले पसीने को सूंघा, तो उन्होंने अपने दाएं नथुने (Right Nostril) का अधिक उपयोग किया। विज्ञान के अनुसार, दाएं नथुने का संबंध मस्तिष्क के उस हिस्से से है जो डर और खतरे को प्रोसेस करता है। इसके विपरीत, खुशी वाले पसीने को सूंघते समय घोड़ों ने अपने बाएं नथुने का उपयोग किया। यह उनके शांत होने का संकेत था।

शरीर पर दिखने वाले लक्षण

जैसे ही घोड़ों ने ‘डर वाले पसीने’ को महसूस किया, उनकी शारीरिक प्रतिक्रिया बदल गई। उनके दिल की धड़कन यानी हार्ट रेट तेज हो गया। उन्होंने अपनी गर्दन ऊंची कर ली और कान खड़े कर लिए। यह दर्शाता है कि वे सतर्क हो गए थे। घोड़ों ने इन Chemosignals (कीमोसिग्नल्स) के जरिए इंसान के डर को अपना लिया था।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गुण घोड़ों के विकासक्रम का हिस्सा है। जंगल में रहने के दौरान उन्हें खतरों को जल्दी भांपना पड़ता था। आज भी उनकी Olfactory System (घ्राण प्रणाली) उन्हें अपने आसपास के माहौल के प्रति संवेदनशील बनाए रखती है।

घुड़सवारों और प्रशिक्षकों के लिए सबक

यह जानकारी उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो घोड़ों के साथ काम करते हैं। यदि कोई घुड़सवार डरा हुआ है, तो उसका शरीर Cortisol (कोर्टिसोल) रिलीज करेगा। घोड़ा उस गंध को सूंघकर खुद भी तनाव में आ जाएगा। इससे घोड़े के अनियंत्रित होने का खतरा बढ़ जाता है।

इसलिए, Equine Psychology (अश्व मनोविज्ञान) के विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घोड़ों के पास जाते समय मन को शांत रखें। आपका आत्मविश्वास और शांति भी घोड़ों को महसूस होती है। वे आपकी गंध से पहचान लेते हैं कि आप उन पर भरोसा करते हैं या नहीं।

निष्कर्ष

घोड़े केवल आपकी आवाज या इशारे नहीं समझते। वे आपकी गंध के जरिए आपकी आत्मा और आपके डर को भी पढ़ लेते हैं। विज्ञान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंसान और जानवर के बीच एक अदृश्य रासायनिक पुल है। अगली बार जब आप किसी घोड़े के पास खड़े हों, तो याद रखें कि वह अपनी नाक से आपकी पूरी कहानी पढ़ रहा है।

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