Netaji Subhas Chandra Bose Birthday: India Celebrates Parakram Diwas, Know the Significance of 23 January
नई दिल्ली (New Delhi): आज का दिन भारत के इतिहास में बहुत खास है। आज 23 जनवरी है। यह महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है। पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। इस दिन को भारत सरकार ‘पराक्रम दिवस’ (Parakram Diwas) के रूप में मनाती है। नेताजी का साहस आज भी हर भारतीय को प्रेरित करता है।
‘पराक्रम दिवस’ क्या है? (What is Parakram Diwas?)
कुछ साल पहले तक इसे सिर्फ सुभाष चंद्र बोस जयंती कहा जाता था। साल 2021 में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने ऐलान किया कि 23 जनवरी को हर साल ‘पराक्रम दिवस’ मनाया जाएगा। ‘पराक्रम’ का मतलब है बहादुरी और शौर्य। नेताजी का जीवन बहादुरी की मिसाल था। इसलिए यह नाम बिल्कुल सही है। इसका मकसद लोगों, खासकर युवाओं में देशभक्ति जगाना है।
इस साल कैसे मन रहा है जश्न (Latest Trends and Celebrations)
इस साल भी नेताजी की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। सुबह से ही सोशल मीडिया (Social Media) पर बधाइयों का तांता लगा है। Twitter (X), Facebook और Instagram पर #ParakramDiwas और #NetajiSubhasChandraBose ट्रेंड कर रहा है। लोग नेताजी के अनमोल विचारों (Netaji Quotes) को शेयर कर रहे हैं।
- लाल किले पर कार्यक्रम (Event at Red Fort): मुख्य समारोह अक्सर दिल्ली के लाल किले में होता है। यहाँ नेताजी और आज़ाद हिंद फौज (Azad Hind Fauj) को श्रद्धांजलि दी जाती है।
- स्कूलों में उत्साह: देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम हो रहे हैं। बच्चे नेताजी की वेशभूषा में नजर आ रहे हैं। भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं हो रही हैं।
- डिजिटल ट्रिब्यूट (Digital Tribute): आजकल डिजिटल तरीके से याद करने का ट्रेंड बढ़ा है। कई ऑनलाइन म्यूजियम और प्रदर्शनियां लगाई गई हैं। लोग वर्चुअल तरीके से नेताजी के जीवन को जान रहे हैं।
नेताजी का जीवन: एक नजर में (Netaji’s Life: A Glance)
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। उनका जन्म ओडिशा के कटक (Cuttack) में हुआ था। वे बचपन से ही बहुत होशियार थे। उन्होंने देश के लिए अपनी आईसीएस (ICS) की नौकरी छोड़ दी थी। वे भारत की आज़ादी के आंदोलन में कूद पड़े। वे महात्मा गांधी के साथ भी रहे, लेकिन उनके विचार थोड़े अलग थे। नेताजी का मानना था कि आज़ादी सिर्फ मांगने से नहीं मिलेगी, छीननी पड़ेगी।
आज़ाद हिंद फौज और ‘जय हिंद’ (INA and Jai Hind)
नेताजी का सबसे बड़ा योगदान ‘आज़ाद हिंद फौज’ (Indian National Army – INA) को मजबूत करना था। वे देश से बाहर गए। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों को एकजुट किया। उन्होंने एक सेना तैयार की ताकि अंग्रेजों से लड़ सकें। उनका नारा आज भी रोंगटे खड़े कर देता है- “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।” भारत का मशहूर नारा “जय हिंद” (Jai Hind) भी नेताजी ने ही दिया था। यह नारा आज हमारी पहचान बन गया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा (Inspiration for Youth)
आज के दौर में नेताजी की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। वे युवाओं (Youth Icon) के लिए एक आदर्श हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि लक्ष्य के लिए कैसे डटे रहना है। वे निडर थे और कभी हार नहीं मानते थे। उनका विजन बहुत साफ था। वे एक ऐसा भारत चाहते थे जहाँ सब बराबर हों।
निष्कर्ष (Conclusion)
23 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह दिन है उस महानायक को नमन करने का जिसने देश के लिए सब कुछ त्याग दिया। ‘पराक्रम दिवस’ पर हमें नेताजी के सपनों का भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए। आइए, हम सब मिलकर कहें- जय हिंद!
