President Vladimir Putin:
नई दिल्ली, एजेंसियां। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की 4–5 दिसंबर की भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा सैन्य समझौता होने के संकेत मिल रहे हैं। रूस की संसद के निचले सदन ‘स्टेट डूमा’ ने भारत के साथ रेसीप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (RELOS) को मंजूरी देने की अंतिम प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दस्तावेज़ को संसदीय पुष्टि के लिए आधिकारिक रूप से अपलोड किया गया है।
इस साल फरवरी में मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के तत्कालीन उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन के बीच RELOS पर हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग करने, मरम्मत, ईंधन, चिकित्सा सहायता, मानवीय मिशन और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को आसान बनाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिंद–प्रशांत और आर्कटिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ को मजबूत करेगा। भारतीय नौसेना के युद्धपोत अब रूसी उत्तरी बेड़े के बंदरगाहों में लॉजिस्टिक सहायता ले सकेंगे, जबकि रूसी नौसेना भारतीय अड्डों का उपयोग कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा पाएगी।
यह समझौता पाकिस्तान, चीन और यहां तक कि अमेरिका के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है। रूस पहले ही अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ इसी तरह की लॉजिस्टिक डील कर चुका है। पुतिन की दिल्ली यात्रा के दौरान भारत को अतिरिक्त एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने की घोषणा भी संभव है।
यह रणनीतिक साझेदारी 2003 से चल रहे भारत–रूस सैन्य तकनीकी सहयोग को नई गति देगी। इससे पहले दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल, एस-400 प्रणाली और एके-203 राइफल उत्पादन जैसे बड़े प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक आगे बढ़ा चुके हैं।


















