Skandamata: नवरात्रि के पांचवें दिन, ऐसे करे देवी स्कंदमाता की पूजा

Juli Gupta
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Skandamata:

आज नवरात्रि का पांचवा दिन है और इस दिन स्कंदमाता की पूजा आराधना की जाती है। कहते हैं कि देवी दुर्गा का यह स्वरूप मातृत्व को परिभाषित करता है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार स्कंदमाता भी पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और इसी वजह से इन्हें मां पार्वती भी कहा जाता है। मां कमल के फूल पर विराजमान अभय मुद्रा में होती हैं इसलिए इन्हें पद्मासना देवी और विद्या वाहिनी दुर्गा भी कहा जाता है।

माता की चार भुजाएं हैं, दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में माता ने भगवान स्कंद यानी कार्तिक को गोद में ले रखा है और नीचे वाली भुजाओं में कमल पुष्प विराजमान है।माता को नारंगी रंग अत्यंत प्रिय है, यह ज्ञान और शांति का प्रतीक है। इस दिन माता को गुड़हल का फूल अर्पित करने व मिठाइयों का भोग लगाने से निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है और सभी कष्टों का निवारण होता है। ऐसे में आइए जानते हैं स्कंदमाता की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती।

मां स्कंदमाता पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक विशालकाय राक्षस था, जिसका नाम तारकासुर था। तारकासुर ने एक बार अपनी घोर तपस्या से ब्रम्हा जी को प्रसन्न कर लिया। उसकी तपस्या से ब्रम्हा जी प्रसन्न हो गए और उससे वरदान मांगने को कहा। ब्रम्हा जी को साक्षात अपने सामने देख उसने अमर होने का वरदान मांगा। यह सुनकर ब्रम्हा जी ने कहा इस धरती पर कोई अमर नहीं हो सकता। जिसके बाद उसने वरदान मांगा की भगवान शिव के पुत्र ही उसका वध कर सकें।

तारकासुर ने सोचा था कि भोलेनाथ कभी विवाह नहीं करेंगे और ना ही उनका कोई पुत्र होगा। तारकासुर यह वरदान प्राप्त करने के बाद तीनों लोको में हाहाकार मचाने लगा और देवी देवताओं पर अत्याचार करने लगा। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार तारकासुर का वध करने के लिए भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया। विवाह के बाद भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया। कहा जाता है कि स्कंदमाता कार्तिकेय की मां थी।

मां स्कंदमाता का स्वरूप

मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं जो कि स्वारमी कार्तिकेय को अपनी गोद में लेकर शेर पर विराजमान हैं। मां के दोनों हाथों में कमल शोभायमान हैं। इस रूप में मां समस्त ज्ञान, विज्ञान, धर्म, कर्म और कृषि उद्योग सहित पंच आवरणों से समाहित विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहलाती हैं। मां के चेहरे पर सूर्य के समान तेज है। स्कंरदमाता की पूजा में धनुष बाण अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

स्कंदमाता को क्या भोग चढ़ाएं ?

स्कंददमाता को पीले रंग की वस्तु एं सबसे प्रिय हैं। इसलिए उनके भोग में पीले फल और पीली मिठाई अर्पित की जाती है। आप इस दिन केसर की खीर का भोग भी मां के लिए बना सकते हैं। विद्या और बल के लिए मां को 5 हरी इलाइची अर्पित करें और साथ में लौंग का एक जोड़ा भी चढ़ाएं।

पीले रंग का महत्व

स्कं दमाता की पूजा में पीले या फिर सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां का श्रृंगार पीले फूल से करें और मां को सुनहरे रंग के वस्त्रे अर्पित करें और पीले फल चढ़ाएं। पीला रंग सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है और इस रूप में दर्शन देकर मां हमारे मन को शांति प्रदान करती हैं।

मां स्कंऔदमाता का पूजा मंत्र

सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां स्कंदमाता की पूजाविधि

मां स्कंदमाता के लिए आप रोजाना की तरह सुबह जल्दीत उठकर स्ना।न कर लें और पूजा के स्थाान को गंगाजल से शुद्ध कर लें। उसके बाद लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां की मूर्ति या फिर तस्वीनर को स्थाकपित करें। पीले फूल से मां का श्रृंगार करें। पूजा में फल, फूल मिठाई, लौंग, इलाइची, अक्षत, धूप, दीप और केले का फल अर्पित करें। उसके बाद कपूर और घी से मां की आरती करें। पूजा के बाद क्षमा याचना करके दुर्गा सप्त शती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। मां आपका कल्याीण करेंगी और आपकी सभी इच्‍छाएं पूर्ण करेंगी।

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