Mumbai Mayor reservation controversy: मुंबई मेयर आरक्षण पर बवाल: ST को क्यों नहीं मिला मौका, जानिए सरकार ने क्या कहा?

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Mumbai Mayor reservation controversy:

मुंबई, एजेंसियां। मुंबई नगर निगम (BMC) के मेयर पद के आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में 29 नगर निगमों के लिए मेयर पद के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई, जिसमें मुंबई में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित हुआ। इस पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने आपत्ति जताई और सवाल उठाया कि अनुसूचित जनजाति (ST) को मुंबई में मेयर पद क्यों नहीं दिया गया।

इस विवाद पर शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल ने नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ST आरक्षण तभी लागू किया जा सकता है, जब किसी नगर निगम में कम से कम तीन अनुसूचित जनजाति के निर्वाचित पार्षद हों। मुंबई नगर निगम में तीन ST पार्षद निर्वाचित नहीं हुए हैं, इसलिए यहां ST आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता।

29 नगर निगमों में ऐसे तय हुआ आरक्षण

माधुरी मिसल ने बताया कि 29 नगर निगमों के लिए आरक्षण जनसंख्या और नियमों के अनुसार तय किया गया। ST आरक्षण चार नगर निगमों में लागू किया गया, जहां आवश्यक संख्या में ST पार्षद मौजूद थे। वहीं, कुछ नगर निगमों में पहले से महिला मेयर या महिला आरक्षण लागू था, इसलिए उन्हें लॉटरी प्रक्रिया से बाहर रखा गया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया भी तय नियमों के तहत हुई। जिन नगर निगमों में पहले ओबीसी मेयर रह चुके थे, उन्हें इस बार शामिल नहीं किया गया। मराठी वर्णमाला क्रम और तय कोटे के अनुसार लॉटरी निकालकर ओबीसी और महिला आरक्षण तय किया गया।

शिवसेना (UBT) की आपत्ति पर सरकार का जवाब

मंत्री ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) की आपत्ति नियमों पर आधारित नहीं है। पूरी लॉटरी प्रक्रिया पारदर्शी थी और इसका लाइव वीडियो भी दिखाया गया। प्रशासन ने नियमों के अनुसार आरक्षण प्रक्रिया पूरी की है और किसी तरह की मनमानी नहीं हुई।सरकार के मुताबिक, मुंबई में महिला मेयर का फैसला पूरी तरह संवैधानिक और नियमसम्मत है। ST को जगह न मिलने की वजह राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधान हैं।

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