Elephant attack in Garhwa: गढ़वा में बकरी चराकर लौट रही बुजुर्ग महिला को हाथी ने बेरहमी से कुचला

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Elephant attack in Garhwa

गढ़वा। गढ़वा जिले के चिनियां थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटना बेता पंचायत के सिदे गांव की है, जहां जंगली हाथी ने एक बुजुर्ग महिला को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। मृतका की पहचान 60 वर्षीय जीरवा देवी, पति मोतीलाल कोरवा, निवासी सिदे गांव के रूप में हुई है।

बकरी चराकर लौटते समय हाथी ने कुचला

मिली जानकारी के अनुसार जीरवा देवी अपने पड़ोस की एक किशोरी के साथ गांव से सटे जंगल में बकरी चराने गई थीं। देर शाम लौटते समय अचानक जंगल में उनका सामना जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने जीरवा देवी पर हमला कर उन्हें बेरहमी से कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद साथ गई किशोरी किसी तरह जान बचाकर जंगल से भागी और गांव पहुंचकर लोगों को घटना की जानकारी दी।

गांव में दहशत, वन विभाग ने रात में उठाया शव

घटना की सूचना मिलते ही पूरे गांव में सनसनी और भय का माहौल फैल गया। सिदे गांव वन समिति अध्यक्ष ने तुरंत चिनियां वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम और हाथी दल रात में ही जंगल पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर देर रात चिनियां वन कार्यालय लाया गया। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे चिनियां थाना क्षेत्र में डर और असुरक्षा का माहौल है।

हाथियों के स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय मुखिया और ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथी लगातार जान-माल का नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए कोई ठोस और स्थायी पहल नहीं की गई है।

विधायक ने उठाए मुआवजे पर सवाल

क्षेत्र के भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि वन विभाग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे हाथियों को रिहायशी इलाकों में आने से रोका जा सके। उन्होंने मुआवजे की राशि पर सवाल उठाते हुए कहा कि “एक जान की कीमत चार लाख नहीं, कम से कम 20 लाख रुपये होनी चाहिए।”

तत्काल सहायता, लेकिन सवाल बरकरार

घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृतका के परिजनों को ₹50,000 की नगद सहायता तत्काल दी गई। हालांकि, हाथियों से होने वाली घटनाओं के स्थायी समाधान को लेकर सवाल अभी भी जस के तस बने हुए हैं।

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