Ibadi sect of Islam
मस्कट, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओमान दौरे के साथ एक बार फिर इबादी इस्लाम चर्चा में है। ओमान दुनिया का ऐसा प्रमुख देश है, जहां इबादी इस्लाम को मानने वालों की सबसे बड़ी आबादी रहती है। इबादी इस्लाम न तो सुन्नी है और न ही शिया, बल्कि इस्लाम की एक अलग और स्वतंत्र धारा है।
इबादी खुद को केवल मुस्लिम या इबादी कहते हैं और मानते हैं कि वे इस्लाम के शुरुआती, शुद्ध स्वरूप के अधिक करीब हैं। इसे विचार और व्यवहार में मध्यमार्गी पंथ माना जाता है, जिसमें तक़वा, न्याय, जवाबदेही और समुदाय की एकता पर ज़ोर दिया जाता है। इबादी मान्यता के अनुसार शासक की वैधता उसके वंश से नहीं, बल्कि उसके न्यायपूर्ण और नैतिक आचरण से तय होती है।
इबादी इस्लाम की जड़
इबादी इस्लाम की जड़ें इस्लाम की पहली सदी (7वीं शताब्दी) में मिलती हैं। इसका नाम विद्वान अब्दुल्लाह इब्न इबाद से जुड़ा है। इतिहासकार मानते हैं कि इसकी उत्पत्ति खारिजी आंदोलन से जुड़ी रही है, लेकिन इबादी पंथ ने हिंसक और कठोर विचारों से दूरी बनाकर संतुलित और सुधारवादी रास्ता अपनाया।
इबादी इस्लाम का सबसे मजबूत केंद्र
आज इबादी इस्लाम का सबसे मजबूत केंद्र ओमान है, जहां समाज, राजनीति और शासन व्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव दिखाई देता है। ओमान की तटस्थ और संवाद-आधारित विदेश नीति को भी इबादी विचारधारा से जोड़ा जाता है। ओमान के अलावा अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया और पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी इबादी समुदाय मौजूद है।
इबादी इस्लाम यह बताता है कि इस्लामी दुनिया केवल सुन्नी और शिया तक सीमित नहीं है। सहिष्णुता, न्याय और सह-अस्तित्व पर आधारित इसकी सोच आज के दौर में खास महत्व रखती है, खासकर तब जब भारत और ओमान जैसे देशों के बीच रिश्ते मजबूत हो रहे हैं।
