Holika Dahan unique tradition: यहां 300 साल से एक दिन पहले जलती आ रही होलिका

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Holika Dahan unique tradition

रांची। रांची के इस मंदिर में होलिका दहन की परंपरा देश में सबसे अलग है। प्राचीन श्री राम मंदिर फगडोल जतरा मेला समिति की ओर आयोजित होलिका दहन रविवार को संपन्न हो गया।
देश में होलिका दहन की तिथि से एक दिन पहले यहां होलिका दहन की परंपरा नागवंशी राजा ने 1685 ईस्वी में शुरू की थी।

800 साल तक नागवंशी राजाओं की राजधानी रही चुटिया में इस परंपरा का निर्वहन आज तक होता आ रहा है। सरना व सनातन का समन्वय भी यहां दिखता है।

रविवार की रात होलिका दहन से पहले गांव के पाहन राम पहान ने अरंडी की डाल को काटा और फिर बिना पीछे मुड़े अपने घर चले गए। इसके पूर्व पाहन ने होलिका के चारों तरफ जलार्पण किया।

पाहन के प्रस्थान करने के बाद होलिका दहन का अन्य कार्यक्रम शुरू हुआ। मंदिर के महंत गोकुल दास एवं नगर पुरोहित शशिभूषण पांडेय ने मधुर स्वर में आरती की।

महंत ने मंगल शंख ध्वनि की। सैकड़ों की संख्या में मौजूद भक्तों ने जय श्रीराम के गगनभेदी नारे लगाए। उसी समय टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को मिली जीत की सूचना ने लोगों का उत्साह दोगुना कर दिया। ग्राम देवता से साल भर में जाने-अनजाने गलती के लिए क्षमा मांगी गई।

इसके बाद चुटिया व राज्य की खुशहाली की कामना की गई। महंत व पुरोहित ने होलिका में आग लगाई और फिर होलिका जल उठी। पूर्व पार्षद विजय साहु इसे चुटिया की महान ऐतिहासिक परंपरा बताते हैं। उन्होंने बताया कि राजा ने पहले यहां इस परंपरा की शुरुआत की। शुरू की।

आज के समय में चुटिया के बाद ही शहर में होलिका दहन होता है। 300 साल से यह परंपरा चली आ रही है। साल भर लोग इस दिन का इंतजार करते हैं। होलिका दहन में पूरा मुहल्ला और गांव शामिल होता है। यह ऐक ऐसी ऐतिहासिक परंपरा है, जो पूरे देश में कहीं और नहीं दिखती।

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