Holika Dahan
नई दिल्ली, एजेंसियां। होली का पर्व नजदीक है और सनातन परंपरा में होलिका दहन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करती है, इसलिए इसकी राख को भी शुभ माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार यह परंपरा भक्त Prahlad और उसके पिता Hiranyakashipu की कथा से जुड़ी है।
होलिका की राख माथे पर क्यों लगाई जाती है?
धार्मिक मान्यता है कि होलिका दहन की राख बुरी नजर और नकारात्मकर्जा से रक्षा करती है। इसे शुभ और पवित्र माना जाता है क्योंकि अग्नि में सभी बुराईयों के जलने का प्रतीक होता है। माना जाता है कि राख लगाने से
नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है।
परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
रोग और संकट से बचाव होता है।
होलिका की राख घर में कहां रखें?
अगर होलिका दहन की राख घर लाएं तो उसे साफ डिब्बी या लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। इसे तिजोरी या धन रखने की जगह पर रखने से आर्थिक समृद्धि बनी रहती है। वहीं, दरवाजे के पास थोड़ी राख छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने की मान्यता है।
राख लगाने की सही विधि
- होलिका दहन के बाद जब अग्नि ठंडी हो जाए तब थोड़ी राख लें।
- अगले दिन स्नान के बाद दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से माथे पर तिलक लगाएं।
- तिलक लगाते समय भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का ध्यान करें।
होलिका दहन का पौराणिक महत्व
होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद और उसके पिता हिरण्यकश्यप से जुड़ी है। इस कथा में बताया गया है कि भगवान की भक्ति की रक्षा हुई और अहंकार का अंत हुआ। इसलिए होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई और सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है।








