India EU Free Trade Agreement: भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में तुर्किए की एंट्री पर ब्रेक, क्या ऑपरेशन सिंदूर बना कारण?

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India EU Free Trade Agreement:

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापार को बड़ी रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इसी बीच यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या इस FTA का फायदा तुर्किए (Turkey) को भी मिलेगा, खासकर तब जब वह EU के कस्टम्स यूनियन का हिस्सा है।

EU कस्टम्स यूनियन में है तुर्किए, लेकिन…

तुर्किए 1996 से EU के कस्टम्स यूनियन में शामिल है। इसके तहत EU और तुर्किए के बीच सामान बिना टैरिफ और कोटा के आ-जा सकता है। भौगोलिक रूप से भी तुर्किए यूरोप और एशिया के बीच स्थित है, इसलिए भारत-EU के बीच होने वाला व्यापार उसके रास्ते से गुजर सकता है। हालांकि, अहम बात यह है कि तुर्किए EU की FTA टेरिटरी का हिस्सा नहीं है।

FTA से तुर्किए को क्यों नहीं मिलेगा लाभ

भारतीय अधिकारियों ने साफ किया है कि भारत-EU FTA के तहत सिर्फ EU देशों को ही टैरिफ में रियायत मिलेगी। अगर तुर्किए का सामान EU के किसी पोर्ट से होकर भी भारत आता है, तब भी उसे FTA का फायदा नहीं मिलेगा। वजह यह है कि सामान की “ओरिजिन” तुर्किए ही मानी जाएगी और उस पर भारत में पूरा टैरिफ लागू होगा।
हालांकि, भारतीय उत्पाद EU के रास्ते तुर्किए जा सकते हैं, लेकिन इसका उल्टा संभव नहीं है।

भारत-तुर्किए रिश्तों में आई तल्खी

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्किए द्वारा पाकिस्तान के समर्थन के बाद भारत-तुर्किए संबंधों में खटास आ गई। इसका असर व्यापार पर भी दिखा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का तुर्किए को निर्यात घटकर 5.71 अरब डॉलर रह गया, जबकि आयात भी करीब 3 अरब डॉलर तक सिमट गया।

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