Supreme Court:
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने तीन महीने पहले जारी अपने आदेशों के पालन न होने पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। सोमवार को जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्य सचिव अदालत में पेश हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह देखेगा कि अब तक उसके आदेशों का कितना पालन हुआ है और अगली सुनवाई में आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि 7 नवंबर 2025 को इस मामले पर नया आदेश पारित किया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने राज्यों से कहा कि वे एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के कार्यान्वयन की स्थिति बताएं और आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी राज्य इस समस्या से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय नीति पर अपने सुझाव प्रस्तुत करें।
अदालत ने नाराजगी जताई:
कोर्ट ने अनुपालन हलफनामों में दिए गए सुझावों का सारांश चार्ट भी मांगा है और कुत्तों के काटने से पीड़ित कुछ लोगों को अभियोग आवेदन दायर करने की अनुमति दी है। अदालत ने नाराजगी जताई कि उसके पहले के आदेशों का पालन ठीक से नहीं हुआ है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2025 को इस मामले का दायरा राष्ट्रीय राजधानी से बढ़ाकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक कर दिया था। अदालत ने नगर निगमों को पशु जन्म नियंत्रण नियमों के पालन से संबंधित पूरी जानकारी जैसे कि कुत्तों के बाड़े, पशु चिकित्सक, पकड़ने वाले कर्मी, वाहन और पिंजरों की उपलब्धता के बारे में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान के रूप में लिया था। अदालत ने 28 जुलाई को उस समय कार्रवाई शुरू की जब दिल्ली में आवारा कुत्तों के हमलों से बच्चों में रेबीज के मामले सामने आए थे। अब 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर नया आदेश सुनाएगा।
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