Shashi Tharoor
नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में सरकार द्वारा ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाने का प्रस्ताव करता है। विपक्ष इसे मनरेगा का नाम और मूल स्वरूप बदलने की कोशिश बता रहा है। इसी बहस के दौरान तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर लंबे समय बाद पार्टी की लाइन के साथ मजबूती से खड़े नजर आए।
शशि थरूर का सरकार पर तीखा हमला
लोकसभा में बोलते हुए शशि थरूर ने सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि “राम के नाम को बदनाम न किया जाए।” उन्होंने देव आनंद की फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा के मशहूर गीत की पंक्ति दोहराते हुए कहा—“देखो ओ दीवानो, तुम ये काम न करो, राम का नाम बदनाम ना करो।” इस टिप्पणी के जरिए थरूर ने सत्तापक्ष पर तीखा कटाक्ष किया।
‘राम राज्य राजनीतिक प्रोजेक्ट नहीं था’
थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी का राम राज्य का विचार कभी राजनीतिक एजेंडा नहीं रहा। यह एक सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण था, जिसकी बुनियाद ग्राम स्वराज और गांवों को सशक्त बनाने पर टिकी थी। उन्होंने कहा कि मनरेगा में गांधी का नाम इस सोच का प्रतीक था कि विकास और रोजगार की गारंटी सबसे कमजोर व्यक्ति से शुरू होनी चाहिए।
नाम बदलने पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि अधिनियम से महात्मा गांधी का नाम हटाना इसके नैतिक आधार और ऐतिहासिक वैधता को कमजोर करता है। उनका कहना था कि रोजगार गारंटी जैसे अधिकार आधारित कानून को धार्मिक या प्रतीकात्मक नामों से जोड़ना इसके मूल उद्देश्य से भटकाने जैसा है।
विपक्ष की साझा रणनीति
शशि थरूर का यह रुख इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के समय में वे कई मुद्दों पर पार्टी से अलग नजर आते रहे हैं। मनरेगा के मुद्दे पर उनका कांग्रेस के साथ खुलकर खड़ा होना संकेत देता है कि विपक्ष इस विधेयक के खिलाफ संसद के भीतर और बाहर संघर्ष तेज करेगा।
