Prayagraj Magh Mela:
लखनऊ, एजेंसियां। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने दुखी मन से विदा लेने का ऐलान कर दिया है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह श्रद्धा और आस्था के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन यहां जो परिस्थितियां बनीं, उनसे उनका मन गहरे आहत हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बिना संगम स्नान किए ही प्रयागराज छोड़ रहे हैं, जो उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक निर्णय है।
शंकराचार्य ने कहा
शंकराचार्य ने कहा कि प्रयागराज सनातन परंपराओं, विश्वास और शांति की भूमि रही है, लेकिन यहां उनकी पहचान और सम्मान पर सवाल उठाने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि एक ऐसी घटना घटी, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उस घटना ने न केवल उन्हें, बल्कि पूरे संत समाज को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने कहा कि संगम में स्नान उनके लिए केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आस्था का विषय है, लेकिन मौजूदा हालात में यह संभव नहीं हो सका।
उन्होंने प्रशासन की ओर से मिले उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया, जिसमें ससम्मान स्नान और पुष्पवर्षा की बात कही गई थी। शंकराचार्य ने कहा कि उस प्रस्ताव में हुई घटना के लिए कोई क्षमा याचना नहीं थी, इसलिए उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि यदि वे ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते, तो अपने भक्तों और संत समाज के साथ न्याय नहीं कर पाते।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने माघ मेले को लेकर क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने कहा कि माघ मेले में संतों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने सरकार और प्रशासन के दोहरे चरित्र को उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संतों का अपमान किया गया और उनके साथ मारपीट तक हुई। उन्होंने दो मिनट का मौन रखकर भगवान से प्रार्थना की कि दोषियों को दंड मिले।
अंत में उन्होंने कहा कि वे प्रयागराज से जा रहे हैं, लेकिन सत्य की गूंज और न्याय की प्रतीक्षा यहीं छोड़कर जा रहे हैं। उनके इस फैसले के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच गहरी चर्चा शुरू हो गई है।
