Dental industry standards
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के शीतकालीन सत्र में दांत के डॉक्टरों द्वारा हेयर ट्रांसप्लांट और एस्थेटिक स्किन सर्जरी किए जाने को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में बताया कि ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जन (OMFS), जिन्हें डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) के MDS कोर्स रेगुलेशन, 2017 के तहत प्रशिक्षित किया गया है, उन्हें क्रैनियो और मैक्सिलोफेशियल क्षेत्र तक सीमित एस्थेटिक स्किन सर्जरी और चुनिंदा मामलों में हेयर ट्रांसप्लांट की अनुमति है।
DCI और NMC के दायरे टकराव नहीं, पूरक
मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि OMFS विशेषज्ञों को उनके मान्यता प्राप्त पोस्ट-ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम के तहत व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है। उनका कार्यक्षेत्र डर्मेटोलॉजी या जनरल मेडिसिन से अलग है, इसलिए डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के दायरे टकराव के बजाय एक-दूसरे के पूरक हैं। सरकार मरीजों की सुरक्षा, नियामक स्पष्टता और पेशेवर मानकों की अखंडता बनाए रखने के लिए विभिन्न वैधानिक निकायों के बीच इंटर-रेगुलेटरी समन्वय को बढ़ावा दे रही है।
तेलंगाना विवाद की पृष्ठभूमि
इस साल जून में तेलंगाना में इस मुद्दे पर विवाद तब खड़ा हुआ था, जब तेलंगाना मेडिकल काउंसिल (TMC) ने कहा था कि डेंटिस्ट और OMFS के पास एस्थेटिक प्रोसीजर और हेयर ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक योग्यता नहीं है। इसके जवाब में डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया था कि DCI के मानकों के अनुसार प्रशिक्षित और पंजीकृत OMFS चेहरे की एस्थेटिक प्रक्रियाएं और हेयर ट्रांसप्लांट करने के लिए पूरी तरह अधिकृत हैं।
सरकार के ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि योग्यता और प्रशिक्षण की शर्तों के साथ OMFS को सीमित दायरे में ये प्रक्रियाएं करने की अनुमति है, जिससे लंबे समय से चले आ रहे भ्रम पर विराम लगा है।
