Javed Akhtar on AI: “खुद को मूर्ख नहीं बनाना चाहिए, आने वाले सालों में नई पीढ़ी को झेलनी होंगी असली चुनौतियां”

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Javed Akhtar on AI:

मुंबई, एजेंसियां। फिल्म इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने गंभीर चिंता जताई है। उनका मानना है कि भले ही फिलहाल AI एक मददगार टूल के रूप में दिख रहा हो, लेकिन आने वाले 5 से 10 सालों में यह नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

एक कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने कहा

एक कार्यक्रम में बोलते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि, “AI अभी एक सक्षम उपकरण है, लेकिन यह सिर्फ वर्तमान तक सीमित है। यह एक सहायक या सचिव की तरह काम कर सकता है, पर असली रचनात्मकता इंसान के अवचेतन मन से निकलती है — जहां तक AI की पहुंच नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि AI में बचपन के अनुभव, दिल टूटने का दर्द, या इंसानी भावनाओं की जटिलता नहीं होती, इसलिए वह सच्ची कला को पूरी तरह नहीं समझ सकता।

“मूर्ख नहीं बनाना चाहिए”

जावेद अख्तर ने आगे कहा कि हमें खुद को यह सोचकर “मूर्ख नहीं बनाना चाहिए” कि AI कभी पूरी तरह से क्रिएटिव क्षेत्र पर हावी नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि “पांच से दस साल में हालात पूरी तरह बदल सकते हैं। शायद मेरे जीवनकाल में नहीं, लेकिन अगली पीढ़ी के कलाकारों को AI से वास्तविक मुकाबला करना पड़ेगा।”

AI के इस्तेमाल पर उनका यह बयान

AI के इस्तेमाल पर उनका यह बयान उस समय आया है जब फिल्म इंडस्ट्री में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में आनंद एल राय की फिल्म ‘रांझणा’ को AI की मदद से नए अंत के साथ फिर से रिलीज़ किया गया था, वहीं चिरंजीवी की ‘हनुमान – द इटरनल’ पूरी तरह AI द्वारा निर्मित फिल्मों में से एक बन गई। इन घटनाओं ने सिनेमा जगत में रचनात्मकता बनाम तकनीक की बहस को और गहरा कर दिया है।

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