Karnataka government:
बेंगलुरु, एजेंसियां। कर्नाटक सरकार ने कामकाजी महिलाओं के हित में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने सभी सरकारी, संविदा और ठेके पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को प्रति माह एक दिन का वेतनभोगी मासिक धर्म अवकाश देने का आदेश जारी किया है। इस निर्णय से 18 से 52 वर्ष की आयु वर्ग की लाखों महिलाओं को राहत मिलेगी।
सरकार ने आधिकारिक आदेश भी जारी की है:
सरकार ने 12 नवंबर को इसका आधिकारिक आदेश जारी करते हुए कहा कि प्रति वर्ष 12 दिन का “पेड पीरियड लीव” (Paid Period Leave) प्रदान किया जाएगा। यह सुविधा उन सभी प्रतिष्ठानों में लागू होगी जो फैक्ट्रीज एक्ट 1948, कर्नाटक दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम 1961, बागान श्रमिक अधिनियम 1951, बीड़ी सिगार श्रमिक अधिनियम 1966, और मोटर वाहन श्रमिक अधिनियम 1961 के तहत आते हैं।
इस आदेश के तहत, महिलाओं को हर महीने एक दिन का मासिक अवकाश लेने का अधिकार होगा। यदि कोई कंपनी या संस्था इस नियम का उल्लंघन करती है या महिलाओं की सैलरी काटती है, तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
आईटी और प्राइवेट सेक्टर की महिलाएं भी होंगी लाभान्वित:
यह नीति केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है। राज्य की सभी आईटी कंपनियों, निजी कार्यालयों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाली महिलाओं को भी इसका लाभ मिलेगा। यह नीति क्राइस्ट यूनिवर्सिटी की डॉ. सपना एस की अध्यक्षता वाली 18 सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है। समिति ने पहले छह दिन की छुट्टी का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में बढ़ाकर 12 दिन किया गया।
मेडिकल सर्टिफिकेट की नहीं होगी जरूरत:
महिला कर्मचारी बिना किसी मेडिकल प्रमाणपत्र के मौखिक रूप से एचआर विभाग को सूचित कर छुट्टी ले सकती हैं। हालांकि, यह छुट्टी केवल उसी महीने में उपयोग की जा सकेगी अगले महीने इसे ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।कर्नाटक का यह निर्णय महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार माना जा रहा है।



