Amazon layoffs reveal: अमेजन की छंटनी ने दिखाया भविष्य का डर, कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी पर संकट

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Amazon layoffs reveal:

नई दिल्ली, एजेंसियां। ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन (Amazon) की हालिया छंटनी ने दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर 14,000 कॉर्पोरेट नौकरियों में कटौती की है, और इस बार इसका असर केवल एंट्री-लेवल प्रोग्रामिंग तक सीमित नहीं रहा। अब मार्केटिंग, फाइनेंस, एचआर और एनालिटिक्स जैसे सेक्टर्स की व्हाइट कॉलर जॉब्स पर भी खतरा मंडराने लगा है।

भारत जैसे युवा-प्रधान देश के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। देश में लाखों ग्रेजुएट हर साल नौकरी की तलाश में निकलते हैं, लेकिन अब कंपनियां तेजी से AI-ड्रिवन सिस्टम्स की ओर बढ़ रही हैं। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे टेक और आउटसोर्सिंग हब्स में पहले से ही जनरेटिव AI टूल्स ने कई पदों को अप्रासंगिक बना दिया है।

AI किन सेक्टर्स को कर रहा प्रभावित?

रिसर्च बताती है कि अब AI सिर्फ कोडिंग या डाटा एंट्री तक सीमित नहीं रहा। Northwestern University और MIT की रिपोर्ट के अनुसार, AI अब उन नौकरियों को भी प्रभावित कर रहा है जिनमें पांच साल तक का प्रोफेशनल प्रशिक्षण जरूरी होता है — जैसे ऑडिटिंग, बैंकिंग, फाइनेंस एनालिसिस और मार्केटिंग स्ट्रेटजी। McKinsey जैसी कंपनियां पहले ही अपने AI टूल “Lilli” का उपयोग स्लाइड डेक और डेटा रिपोर्ट तैयार करने में कर रही हैं, जिससे पारंपरिक नौकरियों की मांग घट रही है।

भारत के युवाओं के लिए क्या खतरा है?

भारत में लगभग 37.5 करोड़ युवा (10-24 वर्ष) के बीच हैं, लेकिन शहरी बेरोजगारी दर पहले से ही 18.5% तक पहुंच चुकी है। अगर AI एंट्री-लेवल नौकरियां खत्म कर देता है, तो नए ग्रेजुएट्स के लिए स्किल अपग्रेड और ट्रेनिंग के मौके भी सीमित हो जाएंगे। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर भारत ने जल्द ही AI-रेडी स्किल्स पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले वर्षों में व्हाइट कॉलर बेरोजगारी बड़ी चुनौती बन सकती है।

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