आज है छठ महापर्व का खरना [Today is Kharna of Chhath Mahaparva]

IDTV Indradhanush
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जानिए किन-किन बातों का रखना होता है ख्याल

नई दिल्ली। चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व की शुरुवात नहाय-खाय के साथ हो गयी है। छठ के अगले दिन खरना होता है। खरना कार्तिक मास की पंचमी को मनाया जाता है। इसे लोहंडा भी कहा जाता है। इस साल खरना आज यानी 6 नवंबर (बुधवार) को है। खरना का समय शाम 5:29 से 7:48 तक है।

खरना का अर्थ होता है शुद्धिकरण। इस दिन एक समय ही भोजन किया जाता है। जिसका मतलब होता है शुद्धिकरण। यह शुद्धिकरण केवल तन का ही नहीं बल्कि मन का भी होता है। इसलिए इस दिन रात में व्रती खीर खाकर छठ के लिए अपने तन और मन को शुद्ध करती हैं।

खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है। व्रती षष्ठी तिथि को अस्ताचलगामी और अगले दिन उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं। पारण के बाद व्रती का 36 घंटे का उपवास खत्म होता है।

नये चूल्हे और आम की लकड़ी में बनाया जाता है प्रसाद

खरना का प्रसाद नये मिट्टी के चूल्हे पर बनता है. लेकिन बदलते जमाने के साथ गैस चूल्हे का उपयोग भी होने लगा है। प्रसाद बनाने के लिए चूल्हे में आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। इसमें दूसरे पेड़ों की लकड़ियों का उपयोग नहीं किया जाता है।

खरना के दिन बनाया जाता है गुड़ का खीर

खरना के दिन खीर, गुड़ तथा चावल का इस्तेमाल कर शुद्ध तरीके से खीर बनाया जाता है। खरना पूजा में खीर के अलावा केला और अन्य चीजें भी रखी जाती हैं। यह अलग-अलग क्षेत्र की परंपरा के मुताबिक होता है। इसके अलावा प्रसाद में रोटी, पूरी, गुड़ की पूरियां और मिठाईयां भी भगवान को चढ़ाया जाता है।

प्रसाद ग्रहण करने के समय नहीं करना चाहिए आवाज

खरना के दिन जब व्रती शाम में पूजा और प्रसाद ग्रहण कर रहे होते हैं तो उस समय घर में पूरी शांति रखी जाती है। क्योंकि माना जाता है कि आवाज होने पर व्रती प्रसाद खाना बंद कर देती हैं। इस दिन घर के सभी सदस्य व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के बाद उनसे प्रसाद लेते हैं।

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