दिनांक – 2 अप्रैल 2024
दिन – मंगलवार
विक्रम संवत् – 2080
अयन – उत्तरायण
ऋतु – वसंत
मास – चैत्र
पक्ष – कृष्ण
तिथि – अष्टमी रात्रि 08:08 तक तत्पश्चात नवमी
नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा रात्रि 10:49 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा
योग – परिघ शाम 6:36 तक तत्पश्चात शिव
राहु काल – दोपहर 03:47 से शाम 05:20 तक
सूर्योदय – 06:31
सूर्यास्त – 06:53
दिशा शूल – उत्तर दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:58 से 05:45 तक
अभिजीत मुहूर्त – दिन 12:17 से 01:07 तक
निशिता मुहूर्त- रात्रि 00.18 अप्रैल 03 से रात्रि 01.05 अप्रैल 03 तक
व्रत पर्व विवरण –
विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
अशांति मिटाने का उपाय
- गाय के गोबर के कंडे लें, उसके ऊपर घी में भीगे हुए चावल डालकर जलाएं l
- घर में शांति आएगी व वास्तु दोष दूर होंगे
- दरिद्रता दूर करने का उपाय
- सूर्य नारायण को प्रार्थना करें, जल चढ़ायें।
- चावल और गाय के दूध की खीर बनायें और सूर्य देव को भोग लगायें ।
- रविवार को बिना नमक के भोजन करने को कहा गया है ।
- ऐसा कुछ समय तक करने से दरिद्रता दूर होती है, इसमें शंका नही ।
काम-धंधे में बरकत के लिए
नौकरी या काम-धंधे में बरकत नहीं आती हो तो गाय की धूलि लेकर उसको ललाट पर लगाकर काम-धंधे पर जाएँ। धीरे-धीरे बरकत होने लगेगी और विघ्न हटने लगेंगे।
पेट सम्बन्धी तकलीफों में
नींबू के रस में सौंफ भिगो दें और जितना नींबू का रस,उतना ही सौंफ भी ले। फिर सौंफ में थोड़ा काला नमक या संत कृपा चूर्ण मिलाकर तवे में सेंक कर रख दो।
ये लेने से पेट का भारीपन, बदहाजमी दूर होगी और भूख खुलकर लगेगी । कब्ज़ की तकलीफ भी ठीक हो जायेगी ।
पढ़ाई में आशातीत लाभ हेतु
विद्यार्थी अध्ययन-कक्ष में अपने इष्टदेव या गुरुदेव का श्रीविग्रह अथवा स्वस्तिक या ॐकार का चित्र रखें तथा नियमित अध्ययन से पूर्व उसे 10-15 मिनट अपनी आँखों की सीध में रखकर पलकें गिराये बिना एकटक देखें अर्थात त्राटक करें । इससे पढ़ाई में आशातीत लाभ होता हैं ।
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