Chirag Paswan Liquor Ban Statement: चिराग पासवान ने शराबबंदी कानून पर उठाए सवाल, कहा- 10 साल बाद समीक्षा जरूरी

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Chirag Paswan Liquor Ban Statement:

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में शराबबंदी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। केंद्रीय मंत्री और Chirag Paswan ने एक दशक पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई है। होली से पहले पटना पहुंचे चिराग ने कहा कि कानून के मूल उद्देश्यों का आकलन किया जाना चाहिए, ताकि कमियों को दूर कर इसे और प्रभावी बनाया जा सके।

‘समीक्षा का मतलब बैन हटाना नहीं’

चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग का अर्थ शराबबंदी खत्म करना नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को समय-समय पर परखा जाना जरूरी होता है। “अगर कानून लागू होने के बावजूद जहरीली शराब से मौतें हो रही हैं, तो यह संकेत है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं खामी है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने दोहराया कि शराब की लत समाज के लिए घातक है और वे पाबंदी के सिद्धांत के पक्ष में हैं, लेकिन क्रियान्वयन की कमियों को दूर करना भी जरूरी है।

जहरीली शराब और अवैध सप्लाई पर चिंता

चिराग ने राज्य में अवैध शराब की सप्लाई और कथित ‘होम डिलीवरी’ के मामलों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि यदि नकली शराब से लोगों की जान जा रही है, तो यह कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने पूरे सिस्टम का “पोस्टमार्टम” करने की बात कही, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

विधानसभा में भी उठी मांग

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में भी शराबबंदी नीति की समीक्षा का मुद्दा उठ चुका है। हालांकि मुख्यमंत्री Nitish Kumar और उनकी पार्टी जेडीयू इस कानून में किसी बदलाव से इनकार करती रही है। चिराग पासवान का बयान ऐसे समय में आया है जब उनकी ही पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक माधव आनंद ने भी सदन में समीक्षा की मांग की थी। अब देखना यह है कि होली के बाद बिहार की राजनीति में शराबबंदी की समीक्षा को लेकर बहस किस दिशा में जाती है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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