Dhanbad Mayor Sanjeev Singh: धनबाद में फिर से ‘सिंह मेंशन’ की धाक! मेयर बने संजीव सिंह क्या फिर जायेंगे BJP में

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Dhanbad Mayor Sanjeev Singh:

धनबाद। कोयलांचल के ‘कोयला सम्राट’ माने जाने वाले दिवंगत सूर्यदेव सिंह के बेटे संजीव सिंह का वनवास खत्म हो गया है। मेयर चुनाव से उनकी किस्मत खुल गई। इसके साथ ही धनबाद की सियासत में ‘सिंह मेंशन’ की धाक फिर से जमती दिख रही है। साथ ही, सिंह मेंशन के लाल संजीव सिंह एक बार फिर धनबाद की राजनीति में सिक्का जमाने निकल पड़े हैं। अब तो बीजेपी में उनकी वापसी के रास्ते भी खुलने लगे हैं। बीते आठ साल तक कोई नेता किसी भी आम आदमी से संजीव सिंह नहीं मिले। कोई सभा नहीं की। कोई बैठक भी नहीं की। आम जनता से कोई कॉन्टैक्ट नहीं रहा। फिर भी धनबाद की जनता ने उन्हें सिर-आंखों पर बैठाए रखा। जब ‘जेलवास’ से वह लौटे, तो उन्हें शहर की सरकार सौंप दी गई।

‘सिंह मेंशन’ में लौटी रौनकः

धनबाद के चौक-चौराहों पर आजकल संजीव सिंह की ही चर्चा है। दरअसल, शनिवार आधी रात के बाद से धनबाद के चर्चित ‘सिंह मेंशन’ का नजारा बदला -बदला-सा दिख रहा। आखिर ऐसा हो भी क्यों नहीं, संजीव सिंह मेयर चुन लिए गए हैं। धनबाद के पूर्व विधायक संजीव सिंह की 2026 में लॉटरी लग गई। साहस और धैर्य के साथ झंझावातों का सामना करते हुए वो राजनीति में एक बार फिर शिखर पर पहुंच गए। आठ साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद निकले तो गाजे-बाजे के साथ उन्हें मेयर की कुर्सी धनबाद की जनता ने सौंप दी। ये अलग बात है कि लगातार लंबे समय तक जेल में रहने की वजह से ‘सिंह मेंशन’ कमजोर दिखने लगा था। लेकिन, संजीव सिंह जेल से बाहर निकलते ही धनबाद की राजनीति पर छा गए।

पत्नी ने संभाला सियासी विरासतः

संजीव सिंह पर पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। ये अलग बात है कि समय-समय पर ‘वक्त’ ने उनकी कड़ी परीक्षा ली। लेकिन, वो जनता के भरोसे और विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहे। जेल में रहने के बावजूद भी समर्थकों की फौज बनी रही। उनके जेल में रहते ही उनकी पत्नी रागिनी सिंह झरिया से बीजेपी के टिकट पर विधायक चुनी गईं। ये अलग बात है कि समय के साथ ‘सिंह मेंशन’ कई खेमों में बट गया। बावजूद इसके, संजीव सिंह की विजय यात्रा एक बार फिर शुरू हो गई है। ये भी सच है कि संजीव सिंह के लंबे समय तक जेल में रहने के समय विधायक रागिनी सिंह ने समर्थकों को एकजुट रखने में पूरी तरह से सफल रहीं।

धनबाद ने ‘बागी’ को बनाया प्रथम नागरिकः

झंझावातों से लड़कर ‘सिंह मेंशन’ एक बार फिर शिखर पर पहुंच गया है। हालांकि, ये कोई पहला मौका नहीं है, इसके पहले भी कई बार ‘सिंह मेंशन’ को परेशानियों ने घेरा। लेकिन, धैर्य और साहस से उन परेशानियों से ‘सिंह मेंशन’ उबरता रहा है। कहा जा सकता है कि ‘सिंह मेंशन’ का ऐसा इतिहास बन गया है कि आठ साल से अधिक समय तक जेल जीवन बिताने वाले झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह जब बाहर निकले, तो लगता है, मेयर की कुर्सी उनका इंतजार कर रही थी। वो अब धनबाद के ‘प्रथम नागरिक’ बन गए हैं। ये अलग बात है कि भाजपा से बागी बनकर जब वो मैदान में उतरे तो भी उन्हें बहुत कुछ सहना और देखना पड़ा। फिर भी अपने निर्णय पर अडिग रहे। समर्थकों का दबाव उन पर था। पत्नी भाजपा से विधायक हैं। ऐसे में कई सवाल उठाए गए। पत्नी रागिनी सिंह चुनाव प्रचार से बिल्कुल दूर रहीं, लेकिन इन सबसे अलग संजीव सिंह और उनके समर्थक चुनाव प्रचार में डटे रहे।

संजीव सिंह की पत्नी झरिया से विधायकः

भाजपा नेताओं ने जहरीली बातें कही, फिर भी कोई असर नहीं हुआ। वैसे सरल स्वभाव के संजीव सिंह बहुत जल्दी किन्हीं बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। इस चुनाव में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया। नतीजा हुआ कि धनबाद की जनता ने उन्हें हाथों-हाथ ले लिया। ये जीत कोई साधारण जीत नहीं है, क्योंकि पहली बार नगर निगम के चुनाव में किसी प्रत्याशी को एक लाख से अधिक मत मिले हैं। संजीव सिंह की ये जीत केवल एक विजय नहीं है, बल्कि ये जीत अपनी आंचल में कई राजनीतिक संदेशों को छुपाए हुए हैं। समय के साथ राजनीतिक संदेश दिखेंगे। झरिया से अपने विधायक कार्यकाल के दौरान लगभग आधे समय तक वो जेल में रहे। उसके बाद हुए चुनाव में उनकी पत्नी भाजपा से उम्मीदवार बनीं। लेकिन, चुनाव हार गईं। ये समय 2019 का था। फिर 2024 का समय आया। समय ने पलटा खाया और संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह झरिया से विधायक बन गई।

मेयर पद की जीत से बढ़ा संजीव सिंह का कदः

कहा जा सकता है कि इस जीत के साथ ही संजीव सिंह का वनवास खत्म हो गया है। कोयलांचल की राजनीति में उनकी दमदार वापसी हुई है। ये वापसी संकेत दे रही है कि धनबाद के 6 विधानसभा क्षेत्र में से 5 में संजीव सिंह की पहुंच बढ़ेगी। धनबाद, झरिया विधानसभा तो पूरी तरह से निगम क्षेत्र में है। सिंदरी विधानसभा क्षेत्र के चार वार्ड, बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के आठ वार्ड नगर निगम क्षेत्र में पड़ता है। टुंडी विधानसभा क्षेत्र का एक वार्ड भी धनबाद नगर निगम क्षेत्र में पड़ता है। इस हिसाब से अगर देखा जाए तो धनबाद के पांच विधानसभा क्षेत्र में अब संजीव सिंह का सीधा प्रभाव दिखेगा। इसी बात का डर अन्य दलों के नेताओं को है कि संजीव सिंह कहीं उनके इलाके में अपना दबदबा कायम न कर ले, अगर ऐसा होता है तो कई पार्टियों की नींव हिल जाएगी।

धनबाद में ‘सिंह मेंशन’ क्या है?

‘सिंह मेंशन’ धनबाद के कतरास रोड पर एक आलीशान बंगला है, जिसे कोयलांचल की राजनीति का सबसे बड़ा शक्ति केंद्र माना जाता है। ये दशकों तक जिले की सत्ता और फैसलों का मुख्य ठिकाना रहा है। ‘सिंह मेंशन’ की पहचान ‘कोयला सम्राट’ कहे जाने वाले दिवंगत सूर्यदेव सिंह से शुरू हुई। वे झरिया के विधायक थे और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेहद करीबी माने जाते थे। ‘सिंह मेंशन’ का प्रभाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि धनबाद के कोयला उद्योग और मजदूर यूनियनों पर भी इस परिवार का लंबे समय तक एकछत्र राज रहा है।

सूर्यदेव सिंह के बाद उनकी पत्नी कुंती देवी, बेटे संजीव सिंह और बहू विधायक रागिनी सिंह ने यहां से झरिया विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। फिलहाल ये परिवार भाजपा और स्थानीय राजनीति में सक्रिय है। बॉलीवुड फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की कहानी काफी हद तक ‘सिंह मेंशन’ और उसके प्रतिद्वंद्वी परिवारों के बीच के संघर्षों के साथ धनबाद के ‘कोल वॉर’ से प्रेरित बताई जाती है।

संजीव सिंह की प्रचंड जीत से बीजेपी में वापसी का रास्ता?

धनबाद नगर निगम चुनाव में संजीव सिंह ने एकतरफा जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवा दिया है। भाजपा से टिकट न मिलने पर बागी होकर चुनाव लड़ने के कारण उन्हें ‘शोकॉज’ नोटिस थमाया गया था, लेकिन इस शानदार जीत ने समीकरण बदल दिए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने संकेत दिया है कि जल्द ही उनका नोटिस वापस लेकर उन्हें विधिवत पार्टी की सक्रिय सदस्यता दी जा सकती है। नीरज सिंह हत्याकांड में अगस्त 2025 में बरी होने के बाद ये चुनाव संजीव के लिए एक अग्निपरीक्षा थी, जिसमें वे सफल रहे। उनकी पत्नी झरिया विधायक रागिनी सिंह का पार्टी में मजबूत कद भी उनकी वापसी की राह आसान बना रहा है।

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