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रांची। झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर वार्ड आरक्षण की अधिसूचना जारी होते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अमर कुमार बाउरी ने अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सरकार पर दलित समाज के साथ भेदभाव करने और उनके अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
एससी वर्ग की अनदेखी का आरोप
मीडिया से बातचीत के दौरान अमर कुमार बाउरी ने कहा कि राज्य सरकार लगातार अनुसूचित जाति वर्ग की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की कई योजनाएं केवल चुनिंदा वर्गों तक सीमित हैं। उदाहरण देते हुए बाउरी ने कहा कि इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही कोचिंग योजनाओं का लाभ केवल अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों को दिया जा रहा है, जबकि दलित छात्रों को इससे वंचित रखा गया है।
नगर निकाय आरक्षण में एकरूपता नहीं
अमर बाउरी ने नगर निगम, नगर पंचायत और नगर परिषद चुनावों में आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आरक्षण तय करने में किसी तरह की एकरूपता नहीं दिखाई दे रही है। रांची नगर निगम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 53 वार्डों में से केवल दो वार्ड ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए गए हैं, जो दलित आबादी के अनुपात के अनुसार बेहद कम है।
राजनीतिक भेदभाव का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक कारणों से एक वर्ग को दबाने और दूसरे वर्ग को लाभ पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य बनने के इतने वर्षों बाद भी दलित समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
आंदोलन की चेतावनी
अमर कुमार बाउरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने पारदर्शिता के साथ सभी वर्गों को समान न्याय नहीं दिया, तो दलित समाज अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने और आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने सरकार से आरक्षण नीति की समीक्षा करने और एससी समाज के साथ न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
