Supreme Court order:
रांची। देशभर में अब राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के एक किलोमीटर दायरे में किसी भी तरह की खनन गतिविधि नहीं की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस संबंध में बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि खनन गतिविधियां वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह रोकना जरूरी है।
गोवा में पहले से प्रतिबंधः
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि पहले यह प्रतिबंध केवल गोवा राज्य के लिए लागू था, जिसे अब पूरे देश में लागू किया जा रहा है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह अदालत लगातार यह मानती रही है कि वन्यजीव अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान से एक किलोमीटर के भीतर खनन गतिविधियां वन्यजीवों के लिए खतरनाक हैं।
आदेश से सारंडा वनक्षेत्र प्रभावित होगाः
हालांकि गोवा फाउंडेशन मामले में यह दिशा-निर्देश सिर्फ गोवा राज्य के लिए जारी किए गए थे, लेकिन अब हमें लगता है कि यही दिशा-निर्देश पूरे देश में लागू होने चाहिए।
पूर्व के आदेश में संशोधनः
कोर्ट ने इस दौरान अपने पहले के 3 जून 2022 के आदेश में संशोधन करते हुए साफ कहा कि अब से किसी भी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य के अंदर या उसके एक किलोमीटर के दायरे में खनन की अनुमति नहीं होगी। अपने पूर्व के आदेश में अदालत ने कहा था इको सेंसिटिव जोन एक किमी के दायरे से बाहर है तभी माइनिंग संभव होगा। अब इसमें बदलाव करते हुए नया आदेश जारी किया है।
झारखंड के सारंडा क्षेत्र पर भी सुप्रीम कोर्ट का निर्देशः
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने टीएन गोडावरमन थिरुमलपद केस की सुनवाई के दौरान दिया। इस दौरान अदालत ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित सारंडा क्षेत्र से संबंधित याचिकाओं पर विचार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सरंडा क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस इलाके में रहने वाले आदिवासियों और वनवासियों के अधिकार वन अधिकार अधिनियम के तहत सुरक्षित रहेंगे।
स्कूल, रेललाइन और अस्पताल रहेंगे सुरक्षितः
कोर्ट ने आदेश में कहा कि सरंडा क्षेत्र में मौजूद स्कूल, रेल लाइनें, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सार्वजनिक संस्थान यथावत रहेंगे और उन पर किसी तरह की रोक नहीं होगी। लेकिन, इस क्षेत्र में किसी भी रूप में खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
