रेल सुविधाओं की मांग पर पाकुड़ के पत्थर व्यवसायियों का आंदोलन, रेलवे लोडिंग पूरी तरह ठप

Anjali Kumari
3 Min Read

Pakur stone traders protest

पाकुड़। रेल सुविधाओं की मांग को लेकर पाकुड़ जिले के पत्थर व्यवसायियों ने शुक्रवार को रेलवे में पत्थर की लोडिंग पूरी तरह ठप कर दी। पत्थर कारोबारी ओनर एसोसिएशन के बैनर तले किए गए इस आंदोलन से रेलवे को भारी राजस्व नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। व्यवसायियों का कहना है कि पाकुड़ जिला रेलवे को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देता है, इसके बावजूद यहां के यात्रियों और कारोबारियों की लगातार अनदेखी की जा रही है। एसोसिएशन ने साफ कहा है कि अब यह स्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आंदोलन की चेतावनी पहले ही दी गई थी

गौरतलब है कि हाल ही में झामुमो के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा ने पाकुड़ के पत्थर व्यवसायियों के साथ बैठक कर यह स्पष्ट किया था कि यदि पाकुड़ के यात्रियों को पर्याप्त ट्रेन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो पत्थर की लोडिंग बाधित की जाएगी। शुक्रवार को यह चेतावनी धरातल पर उतरती नजर आई।

व्यवसायियों की प्रमुख मांगें

पत्थर व्यवसायियों की मांग है कि कोविड-19 के दौरान बंद की गई ट्रेनों का संचालन दोबारा शुरू किया जाए, पाकुड़ मार्ग से गुजरने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए, पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू की जाए और यात्रियों को बेहतर और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

रेलवे और राज्य सरकार को भारी नुकसान की आशंका

पत्थर व्यवसायियों द्वारा रेलवे लोडिंग ठप किए जाने से रेलवे को प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। वहीं, राज्य सरकार को भी करीब 40 लाख रुपये प्रतिदिन के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इस आंदोलन से हजारों मजदूरों के प्रभावित होने की भी संभावना है।

साइडिंग पर खड़े रहे खाली रैक

शुक्रवार को पाकुड़ जिले के अपर साइडिंग, लोअर साइडिंग, बहीरग्राम और तिलभिट्टा रेलवे साइडिंग में कई रेलवे रैक खाली खड़े देखे गए। पत्थर व्यवसायी गोपी बत्रा ने बताया कि रेलवे को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व देने के बावजूद सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि पटना और दिल्ली के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है और कई लोकल व एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन भी बंद कर दिया गया है। व्यवसायियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

Share This Article