Vinay Chaubey ED raid:
रांची। निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। शराब घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में अब ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) और ED (प्रवर्तन निदेशालय) दोनों ने कार्रवाई तेज कर दी है। 24 नवंबर को ACB द्वारा दर्ज की गई FIR को अब ED अपने पूर्व दर्ज ECIR से जोड़ने की तैयारी कर रहा है, जिससे केस और सख्त जांच के दायरे में आ गया है।
जांच में क्या आया सामने?
ACB ने विनय चौबे के खिलाफ चार अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की हैं जहां जांच में यह सामने आया कि उन्होंने अपनी पत्नी, ससुर, साला, साले की पत्नी और करीबी सहयोगियों की मदद से कई शेल कंपनियों का निर्माण किया। इन कंपनियों का उपयोग कथित तौर पर अवैध कमाई को निवेश और सफेद करने में किया गया। ACB की रिपोर्ट के अनुसार, चौबे के पास आय से 1.27 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति मिली है, जिसके लिए कोई वैध स्रोत नहीं पाया गया।
विनय कुमार चौबे पर ED की सख्ती:
ED पहले से ही शराब घोटाले में पीएमएलए के तहत जांच कर रहा है। घोटाले से जुड़ी छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत मिले थे। अब, ACB की नई FIR ने ED की कार्रवाई को और गति दे दी है।
एजेंसी या तो इस FIR को पुराने ECIR में जोड़ सकती है, या फिर नया ECIR दर्ज कर सकती है। मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मजबूत होने के बाद ED निकट भविष्य में गिरफ्तारी, पूछताछ और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई कर सकती है।
परिवार और करीबी सहयोगियों पर भी बढ़ा दबाव:
जांच एजेंसियों की दोहरी कार्रवाई ने चौबे के परिवार और नेटवर्क को भी घेरे में ले लिया है। कई रिश्तेदारों और सहयोगियों के financial transactions और कंपनियों की गतिविधियों की गहन जांच हो रही है।
सरकारी सेवा के दौरान कथित रूप से बनाई गई संपत्तियों की जांच से यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता दिख रहा है।
अब ED और ACB दोनों की आगे की कार्रवाई पर इस केस का भविष्य तय होगा, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नई गिरफ्तारियाँ और और अधिक संपत्तियों पर शिकंजा कस सकता है।








