झारखंड अंडरवर्ल्ड में ‘लेडी डॉन’का जलवा, भैया जैल में भाभियां फ्रंट पर

Anjali Kumari
5 Min Read

Lady Don power in Jharkhand

रांची। झारखंड अंडरवर्ल्ड में एक खतरनाक बदलाव आया है। ‘भैया’ के जले जाते ही ‘भाभियों’ का जलवा दिखने लगा है। झारखंड में क्राइम का फेस बदल रहा है। पुलिस और एटीएस की हालिया जांच रिपोर्ट में इस चौंकाने वाले ट्रेंड का खुलासा हुआ। बड़े गैंगस्टर्स अब सलाखों के पीछे से अपनी पत्नियों और गर्लफ्रेंड के जरिए ‘अपराध का साम्राज्य’ चला रहे हैं। अपराध की दुनिया में महिलाएं सिर्फ टाइम पास नहीं रह गईं हैं, बल्कि, सेकेंड लेयर के तौर पर दमखम दिखा रहीं।

‘लेडी डॉन’ बनकर गैंग का ऑपरेशन, शूटरों को गाइडलाइन और पैसे का लेन-देन मैनेज कर रही हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि पुरुष अपराधियों पर पुलिस की कड़ी नजर है। एनकाउंटर का डर है। इसके चलते गैंगस्टर्स महिलाओं को ‘सेफ हैंड’ के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। ये महिलाएं रंगदारी वसूली से लेकर कोयलांचल में दहशत फैलाने तक के हर बड़े फैसले में शामिल हैं। इस तरह झारखंड में इन दिनों लेडी डॉन का ही जलवा दिख रहा है। इनमें पम्मी, रिया, नरगिस, रोजी, शबनम, रिया और प्रियंका जैसे कुछ प्रमुख नाम झारखंड अंडर वर्ल्ड में चर्चा में हैं।

तीन मोर्चों पर ‘लेडी डॉन’ हैं सक्रिय

जांच में सामने आया है कि महिलाएं मुख्य रूप से तीन स्तरों पर गिरोह को मजबूती दे रही हैं। सबसे पहले ‘मनी ट्रेल’, जहां पुरुषों के बैंक खातों पर निगरानी होने के कारण अवैध पैसा महिलाओं के खातों में खपाया जा रहा है। दूसरा मोर्चा ‘लॉजिस्टिक्स’ का है, जिसमें पुलिस को कम शक होने का फायदा उठाकर महिलाएं हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी कर रही हैं। तीसरा पहलू ‘कानूनी और सहानुभूति कार्ड’ है, जिसका उपयोग गिरफ्तारी के समय पुलिस के खिलाफ ढाल के रूप में किया जाता है।

अमन साव गैंग की ‘लेडी कमांडर’ पम्मी

अमन साव और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी पम्मी ने अपराध जगत में अपनी गहरी पैठ बनाई है। कुख्यात अपराधी आकाश राय की पत्नी पम्मी, अमन साव की सबसे करीबी सहयोगी रही है। वो शूटरों को रसद पहुंचाने, हथियारों का इंतजाम करने और फिरौती की रकम को ठिकाने लगाने में माहिर थी। छत्तीसगढ़ में एक बड़े कारोबारी के घर हुई फायरिंग में भी उसका नाम प्रमुखता से आया, जिसके बाद उसे सिमडेगा से गिरफ्तार किया गया।

सुजीत सिन्हा की गैंग संभाल रहीं रिया और प्रियंका

गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी रिया सिन्हा ने ‘कोयलांचल शांति सेना’ के नाम से एक मुखौटा संगठन बनाकर गिरोह को ऑपरेट किया। रिया का काम नौजवानों को पैसों का लालच देकर गैंग में भर्ती करना और ठेकेदारों की रेकी करना था। वहीं, बीसीए की पढ़ाई कर चुकी प्रियंका को गिरोह की ‘सेकंड-इन-कमांड’ माना जाता था। प्रियंका सीधे तौर पर कारोबारियों को फोन कर करोड़ों की रंगदारी मांगती थी और शूटरों को टारगेट की जानकारी देती थी। इन दोनों की गिरफ्तारी रांची पुलिस की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

प्रिंस खान गैंग में नरगिस और रोजी का जलवा

धनबाद और आसपास के इलाकों में दहशत का दूसरा नाम बने प्रिंस खान के गिरोह में भी महिलाओं की लीडिंग रोल में हैं। नरगिस बानो, जो सद्दाम अंसारी की पत्नी है, गैंग के लिए ‘अकाउंटेंट’ का काम करती थी। वो रंगदारी से मिलने वाली लेवी का पूरा हिसाब रखती थी और गिरोह के गुर्गों को सैलरी देती थी। इसी गैंग से जुड़ी रोजी परवीन ने रांची के एक बड़े कारोबारी से एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगकर पुलिस को चुनौती दी थी, जिसके बाद उसे सलाखों के पीछे भेजा गया।

एटीएस का अब ‘लेडी डॉन’ पर शिकंजा

गैंगस्टरों की पत्नियों के इस बढ़ते दबदबे को देखते हुए झारखंड पुलिस और एटीएस ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। अब न केवल सक्रिय अपराधियों, बल्कि उनके परिवार की महिलाओं और उनके बैंक खातों की भी गहन स्क्रूटनी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लेडी डॉन का ये उभरता सिंडिकेट राज्य की सुरक्षा के लिए नई चुनौती है, जिसे तोड़ने के लिए आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU के साथ मिलकर छापेमारी की जा रही है, ताकि गिरोह की कमर तोड़ी जा सके। झारखंड में लेडी डॉन की सूची अभी और लंबी है। खासतौर नशे के कारोबार में इन लेडी डॉन की ही प्रमुख रहती है।

Share This Article