Jharkhand bandh: झारखंड बंद का मिला-जुला असर, चाईबासा में सड़कों पर उतरे आदिवासी संगठन

Anjali Kumari
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Jharkhand bandh

खूंटी/चाईबासा, एजेंसियां। आदिवासी नेता सह पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में शनिवार को आदिवासी संगठनों द्वारा बुलाए गए झारखंड बंद का राज्यभर में मिला-जुला असर देखने को मिला। कुछ जिलों में बंद का व्यापक प्रभाव दिखा, जबकि कई इलाकों में जनजीवन सामान्य बना रहा। बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हत्यारों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग की।

खूंटी में बंद का सबसे ज्यादा असर

खूंटी जिले में बंद का प्रभाव सबसे अधिक नजर आया। सुबह से ही आदिवासी संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और जगह-जगह टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। बंद समर्थकों ने मुख्य मार्गों पर नारेबाजी करते हुए यातायात बाधित किया। बाजार और दुकानें भी आंशिक रूप से बंद रहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक सोमा मुंडा के हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

चाईबासा में भी दिखा बंद का प्रभाव

पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा, जगन्नाथपुर और नोवामुंडी क्षेत्रों में भी बंद का असर देखने को मिला। कई चौक-चौराहों पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। लंबी दूरी और लोकल बसों का परिचालन बाधित रहा, जिसके कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रशासन की मौजूदगी के चलते स्थिति पूरी तरह बेकाबू नहीं हुई।

अन्य जिलों में स्थिति रही सामान्य

रामगढ़ जिले के कुज्जू थाना क्षेत्र अंतर्गत नया मोड़ पर आदिवासी समाज के लोगों ने एनएच-33 को कुछ समय के लिए जाम किया, जिसे बाद में हटा लिया गया। वहीं पाकुड़, चतरा, साहिबगंज, गुमला, गिरिडीह, दुमका, सरायकेला, गोड्डा, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा और लातेहार जिलों में बंद का कोई खास असर नहीं दिखा। सिमडेगा में एनएच-143 को जाम करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर यातायात बहाल कर दिया।

सोमा मुंडा हत्याकांड की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 7 जनवरी को खूंटी जिले के जमुआदाहा के पास आदिवासी नेता सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना से आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। पुलिस ने जमीन विवाद को हत्या का कारण बताते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन शूटर और मुख्य साजिशकर्ता अब भी फरार हैं। इसी को लेकर आदिवासी संगठनों में नाराजगी बनी हुई है।

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