रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि देश में आदिवासियों की आबादी 12 करोड़ है पर जनगणना में उनके लिए कॉलम तक न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। वे नई दिल्ली में आयोजित इंडिया फॉर सोशल जस्टिस के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में ऑनलाइन जुड़कर अपनी बातें रख रहे थे। हेमंत ने सम्मेलन में कहा कि भारत के लिए सामाजिक सुरक्षा का विषय बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि पहचान और प्रतिनिधित्व दो ऐसे विषय हैं जिनके लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपना बचपन, जवानी और बुढ़ापा सब कुछ न्यौछावर किया है।
शिबू सोरेन आदिवासी नेता के रूप में देश के पहले व्यक्ति होंगे, जिन्होंने इतना लंबा संघर्ष करने के बाद अपनी एक जगह बनायी। उन्होंने कहा कि व्यापक गरीबी, शोषण और समाज पर हो रहे चौतरफा हमले के बीच यह मुकाम हासिल करने में एक उम्र कट जाती है। इससे समझा जा सकता है कि एक व्यक्ति के लिए खुद की पहचान और प्रतिनिधित्व की लड़ाई में पूरी उम्र कट जाती है, तो पूरे समाज को आगे आने में कितना वक्त लगेगा।
हेमंत ने कहा कि आज भी आदिवासी समाज के लिए देश के अंदर कोई जगह नहीं है। यह दुर्भाग्य है कि देश के लगभग 12 करोड़ आदिवासी समूह के लिए जनगणना में कोई स्थान नहीं है। जबकि झारखंड में वर्ष 2019 में उनकी सरकार बनने के साथ ही सामाजिक सुरक्षा पर फोकस किया जा रहा है। झारखंड विधानसभा में 13 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी है. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और जिला परिषद के चुनाव में 50 फीसदी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई है।
50 फीसद आरक्षण की सीमा से भी अधिक महिलाएं चुनाव जीतकर आ रही हैं। यह एक अच्छा संकेत है. देश में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रयास शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में महिला आरक्षण बिल लाया है। कई सारे ऐसे कानून हमारे संविधान में अंकित हैं, लेकिन व्यवहार में बहुत फर्क नजर आता है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित, पिछड़ों, मजदूरों को सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच दिलाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसके लिए कई योजना और कानून भी बनाए हैं।







