विश्वविद्यालय में नए स्वपोषित पाठ्यक्रमों की शुरुआत अकादमिक और वित्तीय स्थायित्व को बढ़ावा देने का प्रतीक । [The introduction of new self-financed courses in the University symbolises promotion of academic and financial sustainability ]

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कुलपति प्रो डॉ तपन कुमार शांडिल्य।

रांची । आज दिनांक 19 नवंबर को अपराह्न 3 बजे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के कांफ्रेंस हॉल में कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के अकादमिक काउंसिल की बैठक आयोजित की गई।

आज की इस महत्वपूर्ण बैठक में तीन महत्वपूर्ण एजेंडों या प्रस्तावों पर चर्चा और सहमति प्रदान की गई।

अपनी अध्यक्षता में इन प्रस्तावों की मंजूरी पर कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की अधिक है कि पारंपरिक पाठ्यक्रमों के अलावा रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को भी विद्यार्थियों के लिए प्रत्यक्ष तौर पर उपलब्ध कराया जाए ताकि इस प्रोफेशनल युग में वह अपनी आजीविका पा सके।

इसे ध्यानगत रखते हुए आज जिन प्रस्तावों को विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल के द्वारा अनुमोदित किया गया है, उनमें मनोविज्ञान विभाग के अंतर्गत खेल मनोविज्ञान पाठ्यक्रम और बायो टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम को प्रारंभ किया जाना रहा ।

इन दोनों पाठ्यक्रमों को स्वपोषित पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रारंभ किया जाना है। इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव में नई शिक्षा नीति के तहत योगिक साइंस के पाठ्यक्रम को भी मंजूरी प्रदान की गई।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले छह माह से प्रत्येक संकाय में चाहे वह पारंपरिक हो या वोकेशनल, ऐसे पाठ्यक्रमों को चिह्नित किया जा रहा है जिसके अंतर्गत स्वपोषित पाठ्यक्रमों को शुरू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि आज इस बैठक के दौरान सभी सदस्यों से पर्याप्त विचार विमर्श के दौरान यह तय किया गया कि आनेवाले दिनों में अन्य कई ऐसे स्वपोषित पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की योजना प्रत्येक विभागों के माध्यम से प्रस्तावित किया जाएगा ताकि उसे विद्यार्थियों के हित में शुरू किया जा सके।

इसके अलावा अकादमिक काउंसिल में विभिन्न परीक्षा संबंधी कार्यक्रम, रिसर्च जर्नल और अकादमिक मुद्दों पर भी विस्तार से विमर्श और संवाद हुआ।

कांफ्रेंस हॉल में आयोजित इस अकादमिक काउंसिल की बैठक में कुलसचिव डॉ नमिता सिंह के अलावा सभी संकाय के डीन, विभागाध्यक्ष, वोकेशनल पाठ्यक्रमों के निदेशक और समन्वयकों की उपस्थिति रही। यह जानकारी पीआरओ प्रो राजेश कुमार सिंह ने दी।

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