How to Wear Santhali Saree: पारंपरिक संथाली साड़ी कैसे पहनें? आसान स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

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संथाली संस्कृति और इतिहास

How to wear Santhali Saree:

झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के संथाल परगना इलाकों में यह पहनावा आम है। यह तरीका सिर्फ कपड़े पहनना नहीं, बल्कि एक मेहनती जीवनशैली का हिस्सा है।

आइये, बिल्कुल आसान और देसी भाषा में सीखते हैं कि पारंपरिक संथाली साड़ी कैसे पहनें

ज़रूरी चीज़ें (What You Need)

इस शैली के लिए आपको फैंसी चीज़ों की ज़रूरत नहीं है।

  1. संथाली साड़ी: यह आमतौर पर मोटे सूती कपड़े की होती है। इसमें अक्सर चेक पैटर्न या धारियां होती हैं।
  2. ब्लाउज और पेटीकोट (ऐच्छिक): पारंपरिक रूप से, आदिवासी महिलाएं इन्हें नहीं पहनती थीं। साड़ी को ही लपेटा जाता था। लेकिन आजकल सुविधा के लिए आप इसे पहन सकती हैं।

पहनने का तरीका: स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step Guide)

यह तरीका आम साड़ी पहनने से काफी अलग है। ध्यान से पढ़ें।

1. पहली गांठ (The First Tuck)

  • साड़ी का एक छोर पकड़ें।
  • इसे अपनी कमर के दाईं ओर (right side) पेटीकोट में खोंस लें।
  • अगर पेटीकोट नहीं है, तो कमर में एक मज़बूत गांठ बांध लें।
  • साड़ी को घड़ी की उल्टी दिशा (anti-clockwise) में एक बार पूरा घुमाएं।

2. निचला हिस्सा (Lower Draping)

  • संथाली शैली में सामने की तरफ ज्यादा प्लीट्स (चुन्नटें) नहीं बनाई जातीं।
  • यही इसकी खासियत है।
  • साड़ी को बस अपनी लंबाई के अनुसार एडजस्ट करें।
  • बचे हुए कपड़े को कमर में बाईं ओर (left side) खोंस लें ताकि चलने में आसानी हो।
  • यह तरीका खेतों में काम करने के लिए बहुत आरामदायक होता है।

3. पल्लू का अनोखा तरीका (The Unique Pallu)

  • अब साड़ी के बाकी हिस्से को अपनी पीठ के पीछे से घुमाकर दाईं ओर लाएं।
  • यहाँ पर ध्यान दें, यह सबसे ज़रूरी स्टेप है।
  • कपड़े को अपनी छाती को ढकते हुए तिरछा ऊपर ले जाएं।
  • इसे अपने बाएं कंधे (left shoulder) के ऊपर से पीछे की तरफ डालें।

4. पल्लू को लॉक करना (Securing the Pallu)

  • आम साड़ियों में पल्लू पीछे लटकता रहता है, लेकिन इसमें नहीं।
  • पीछे लटकते हुए पल्लू के छोर को पकड़ें।
  • इसे खींचकर अपनी पीठ के रास्ते वापस बाईं कमर की तरफ लाएं।
  • इस छोर को अपनी कमर में सामने की तरफ बाईं ओर मज़बूती से खोंस लें।

बधाई हो! आपकी पारंपरिक संथाली साड़ी ड्रेप तैयार है।

यहाँ एक विजुअल गाइड दी गई है जिसे आप समझ सकते हैं:

How to wear Santhali Saree

यह शैली खास क्यों है? (Why is this special?)

इस ड्रेप की सुंदरता इसकी उपयोगिता में है।

  • आज़ादी: क्योंकि पल्लू कमर में बंधा होता है, दोनों हाथ काम करने के लिए पूरी तरह फ्री रहते हैं।
  • संस्कृति: यह छोटानागपुर पठार और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों की पहचान है।
  • सादगी: इसमें पिन या ब्रोच की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह पूरी तरह प्राकृतिक है।

अगली बार जब आप कुछ अलग और पारंपरिक पहनना चाहें, तो इस संथाली ड्रेप को ज़रूर आज़माएं। यह सिर्फ एक पहनावा नहीं है, बल्कि भारत की एक समृद्ध आदिवासी विरासत का सम्मान है। इसे गर्व से पहनें।

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