Civil Service Scam
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की द्वितीय सिविल सेवा नियुक्ति घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में जांच की रफ्तार तेज कर दी है। एजेंसी ने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और दाखिल चार्जशीट के आधार पर 60 आरोपियों के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है। ईडी अब घोटाले से जुड़े सभी आरोपियों के बैंक खातों की गहन जांच करेगी, ताकि अवैध लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत जुटाए जा सकें।
घोटाले के समय के बैंक लेनदेन पर फोकस
ईडी उन बैंक खातों की जांच करेगी, जिनमें घोटाले के उजागर होने के दौरान भारी मात्रा में रकम जमा हुई थी। जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि यह पैसा कहां से आया, किस उद्देश्य से भेजा गया और इसका इस्तेमाल कैसे किया गया। बैंकिंग विवरण सामने आने के बाद आरोपियों को समन जारी कर पूछताछ की जाएगी। जांच अधिकारियों का मानना है कि बैंक ट्रांजैक्शन से घोटाले की आर्थिक कड़ियां स्पष्ट होंगी।
तत्कालीन जेपीएससी अधिकारियों पर शिकंजा
ईडी की शुरुआती जांच में जेपीएससी के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों पर विशेष फोकस है। इन पर आरोप है कि उन्होंने अंकों में हेराफेरी की, रिश्तेदारों और चहेते अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया, नियमों का उल्लंघन किया और कॉपियों की जांच के लिए पसंदीदा परीक्षकों का चयन किया।
जांच के दायरे में शामिल प्रमुख नाम
तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद
तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह, शांति देवी, राधा गोविंद
तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी
असिस्टेंट को-ऑर्डिनेटर (इवैल्युएशन)
आरोपी परीक्षक और इंटरव्यू एक्सपर्ट की सूची तैयार
ईडी ने उन परीक्षकों और इंटरव्यू बोर्ड एक्सपर्ट्स की सूची भी तैयार कर ली है, जिन पर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से अंक देने का आरोप है। सूची में कई प्रोफेसर और विषय विशेषज्ञों के नाम शामिल हैं। साथ ही इंटरव्यू पैनल एक्सपर्ट अलबर्ट टोप्पो और सोहन राम भी जांच के घेरे में हैं।

