Bihar Elections 2025:
पटना,एजेंसियां। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एनडीए की चुनावी रणनीति, नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों को एक बार फिर सबसे मजबूत साबित किया। 243 में से 200 से अधिक सीटें जीतकर एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि आरजेडी अपने इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शन में से एक तक सिमट गई। महागठबंधन पूरी तरह बिखरा नजर आया।
नीतीश कुमार
20 साल की सत्ता में रहने के बावजूद नीतीश कुमार अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहे। उन्होंने न केवल सत्ता विरोधी लहर को रोक लिया, बल्कि 80 से अधिक सीटें जीतकर महागठबंधन के “युवा बनाम अनुभव” नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया। नतीजे साफ बताते हैं कि जनता ने नीतीश को एक बार फिर स्थिर नेतृत्व का विकल्प माना।
चिराग पासवान
2020 में मात्र 1 सीट जीतने के बाद चिराग पासवान ने इस बार शानदार वापसी करते हुए 19 सीटें जीत लीं। दलित वोटरों और युवा मतदाताओं पर उनकी अपील निर्णायक साबित हुई। चिराग ने एनडीए के वोट बैंक को बड़े पैमाने पर मजबूत किया।
ओवैसी और AIMIM: सीमांचल ने बदला चुनावी गणित
AIMIM ने सीमांचल क्षेत्र में जोकीहाट, कोचाधामन, अमौर, बैसी और बहादुरगंज जैसी सीटों पर जीत हासिल कर महागठबंधन को भारी नुकसान पहुंचाया। AIMIM ने मुस्लिम बहुल सीटों पर महागठबंधन की पारंपरिक बढ़त को तोड़ दिया।
महिला मतदाता: एनडीए का सबसे मजबूत स्तंभ
इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर महिला वोटर बने। पहली बार महिलाओं की मतदान दर पुरुषों से कहीं अधिक 71.6% रही। शराबबंदी, 10,000 रुपये की महिला रोजगार योजना, नौकरी में 35% आरक्षण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सीधे एनडीए को मिला। महिला वोट ने निर्णायक रूप से चुनावी नतीजों की दिशा बदल दी।
एनडीए की एकजुटता और छोटे दलों का शानदार प्रदर्शन
HAM, RLM और LJP(R) जैसे दलों ने इस बार बेहतर प्रदर्शन किया। HAM ने 5 सीटें, LJP(R) ने 20 और RLM ने 4 सीटें जीतकर एनडीए का स्कोर 200 पार करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर महागठबंधन लगातार आंतरिक विवादों और नेतृत्व संकट से जूझता रहा।
बिहार चुनाव 2025 विकास, नेतृत्व, सामाजिक समीकरणों और महिला सशक्तिकरण के इर्द-गिर्द घूमता दिखा। एनडीए की रणनीति जहाँ बिल्कुल सटीक रही, वहीं महागठबंधन बिखरा और कमजोर साबित हुआ नतीजा, एनडीए की ऐतिहासिक जीत।
