Land for Jobs Case:
पटना, एजेंसियां। राजधानी पटना की एक विशेष अदालत में आज मंगलवार को बहुचर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ भ्रष्टाचार मामले में अहम सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय महासचिव और लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले भोला यादव द्वारा दायर याचिका पर होगी। भोला यादव इस मामले में सह-आरोपी हैं और उन्होंने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
गवाहों के बयान पर उठाए गए सवाल
भोला यादव की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि सीबीआई ने जिन पांच लोगों को सरकारी गवाह बनाया है, उनके बयान कानून के प्रावधानों के अनुसार दर्ज नहीं किए गए। याचिका में कहा गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने से पहले गवाहों को माफी दी जानी चाहिए थी, लेकिन सीबीआई ने पहले बयान दर्ज किए और बाद में माफी दी, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
दबाव में बयान दर्ज कराने का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि गवाहों के बयान स्वेच्छा से नहीं दिए गए, बल्कि दबाव में दर्ज कराए गए हैं। ऐसे में इन बयानों को सबूत के तौर पर मान्य नहीं माना जाना चाहिए। बचाव पक्ष का तर्क है कि अवैध प्रक्रिया के तहत लिए गए बयान किसी को दोषी ठहराने का आधार नहीं बन सकते।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला
‘लैंड फॉर जॉब’ मामला जमीन के बदले नौकरी देने से जुड़ा एक कथित भ्रष्टाचार मामला है। आरोप है कि सरकारी नौकरियों के बदले लोगों से जमीन ली गई और इसका गलत तरीके से लाभ उठाया गया। इस मामले में कई बड़े राजनीतिक नाम शामिल हैं और लंबे समय से इसकी जांच चल रही है।
सुनवाई के संभावित असर
अगर अदालत भोला यादव की याचिका स्वीकार कर लेती है, तो इससे सीबीआई के मामले को बड़ा झटका लग सकता है। वहीं, याचिका खारिज होने की स्थिति में जांच एजेंसी के गवाहों के बयान वैध माने जाएंगे और मामला आगे बढ़ेगा।आज की सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर यह तय करेगी कि गवाहों के बयान कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज किए गए थे या नहीं।
