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पटना, एजेंसियां। बिहार में मुख्यमंत्री पद के बदलाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे और इसके बाद नई सरकार का गठन किया जाएगा। बीजेपी अब राज्य में मुख्यमंत्री पद अपने पक्ष में लाने की तैयारी कर रही है।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और नीतीश कुमार के बीच नई सरकार को लेकर मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि नई सरकार का गठन 10 अप्रैल के बाद संभव है। यह तारीख राज्यसभा के नए टर्म की शुरुआत से जुड़ी है।
अमित शाह ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा
नीतीश कुमार ने 5 मार्च को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। अमित शाह ने इस अवसर पर नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा, “नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं। 2005 से आज तक उनका कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में दर्ज है। उन्होंने जंगलराज को खत्म किया, विकास की गति बढ़ाई और राज्य का कायाकल्प किया। इतने लंबे कार्यकाल में भी उन पर कोई दाग नहीं है।”केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस निर्णय का समर्थन किया और कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में जो भी सरकार बनेगी, उसका नेतृत्व उन्हीं के मार्गदर्शन में होगा।
हालांकि इस निर्णय से राज्य की सियासत गर्मा गई है। आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी ने नीतीश कुमार पर मानसिक रूप से दबाव डाला और यह निर्णय उनके लिए सहानुभूति के कारण लिया गया। वहीं कांग्रेस ने दावा किया कि उनके बेटे निशांत को डिप्टी सीएम बनाने का लालच देकर इस प्रक्रिया को सुगम बनाया गया।
सूत्रों का क्या है कहना?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और बीजेपी के मुख्यमंत्री बनने की प्रक्रिया से बिहार में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव बीजेपी के लिए राज्य में सत्ता मजबूत करने का अवसर भी होगा।सूत्रों का कहना है कि 10 अप्रैल को नीतीश कुमार का इस्तीफा देने के बाद बीजेपी नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करेगी और उसी दिन नई सरकार का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य में सत्ता का नया समीकरण स्थापित होगा, जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगा।







