Bihar elections: बिहार चुनाव में महिला शक्ति का जलवा, 80% से ज्यादा वोटिंग कर रचा इतिहास

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Bihar elections:

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार आधी आबादी ने इतिहास रच दिया है। पहले और दूसरे दोनों चरणों की वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं आगे रही। 14 नवंबर को नतीजे आने हैं, लेकिन इससे पहले ही मतदान प्रतिशत ने चुनावी तस्वीर बदल दी है। इस बार आजादी के बाद पहली बार 69.20 प्रतिशत की रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग हुई, जिसमें महिलाओं का योगदान निर्णायक रहा।

महिलाओं ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड:

पहले चरण में महिलाओं की वोटिंग दर 75 फ़ीसदी से अधिक सिर्फ पांच जिलों – मधेपुरा, सहरसा, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में थी। लेकिन दूसरे चरण में महिलाओं ने सभी पुराने आंकड़े ध्वस्त कर दिए। सुपौल, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में महिला मतदान 80 फ़ीसदी से अधिक पहुंचा। किशनगंज में तो महिलाओं ने 88.57 प्रतिशत वोटिंग करके नया कीर्तिमान बनाया, जबकि पुरुषों का मतदान यहां सिर्फ 69.07 प्रतिशत रहा।
सुपौल में 83.69%, पूर्णिया में 83.66% और कटिहार में 84.13% महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह दर्शाता है कि महिला मतदाता अब न केवल राजनीतिक रूप से जागरूक हैं बल्कि अपने अधिकारों को लेकर भी पहले से ज्यादा मुखर हैं।

ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक बढ़ी भागीदारी:

दिलचस्प बात यह रही कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का उत्साह शहरी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा देखा गया। सुबह से ही महिलाएं कतारों में खड़ी नजर आईं। जहां कभी महिलाओं के घर से निकलने में हिचक होती थी, वहीं अब वे लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।

किन जिलों में रहा सबसे ज्यादा असर:

बिहार के कई जिलों में महिलाओं की वोटिंग दर पुरुषों से 10 फ़ीसदी तक अधिक रही। पहले चरण में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में 7.48 फ़ीसदी ज्यादा वोट किया, जबकि दूसरे चरण में यह अंतर बढ़कर 10.15 फ़ीसदी हो गया।

सबसे अधिक महिला मतदान वाले शीर्ष जिले रहे:

किशनगंज: 88.57%

कटिहार: 84.13%

सुपौल: 83.69%

पूर्णिया: 83.66%

बिहार में बदलती चुनावी तस्वीर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी बिहार की राजनीति में नया संतुलन पैदा कर सकती है। अब पार्टियां अपने चुनावी एजेंडे में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा जोर देंगी। महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विषय निर्णायक बन सकते हैं।
बिहार की आधी आबादी ने इस बार लोकतंत्र के पर्व को वास्तव में ‘जनपर्व’ बना दिया है। सुपौल से किशनगंज तक महिला मतदाताओं ने न सिर्फ मतदान प्रतिशत बढ़ाया बल्कि यह भी साबित किया कि अब बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका सबसे मजबूत है।

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