Nepal violence:
काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल में बीते दिनों सरकार के खिलाफ युवाओं का विरोध इतना हिंसक हो गया कि संसद, सरकारी दफ्तरों, होटलों और निजी इमारतों को भी आग के हवाले कर दिया गया। इस बेकाबू हालात में कई भारतीय नागरिक भी फंस गए थे। भारत सरकार के प्रयासों से अब अधिकांश को सुरक्षित वापस लाया गया है।
दिल्ली की ख्याती: “मौत हर तरफ नजर आ रही थी”
दिल्ली की द्वारका निवासी ख्याती काम से काठमांडू गई थीं। उनका होटल एयरपोर्ट से सिर्फ आधे घंटे की दूरी पर था, लेकिन चारों तरफ फैली आगजनी और हिंसा के कारण बाहर निकलना असंभव था। प्रदर्शनकारियों ने जब होटल को भी निशाना बनाना शुरू किया तो उनकी जान सांसत में पड़ गई। अंततः भारतीय दूतावास और स्थानीय मदद से वह सुरक्षित एयरपोर्ट पहुंचीं और अब दिल्ली लौट आईं।
गाजियाबाद के राजेश देवी: होटल से कूदकर मौत
गाजियाबाद के राजेश देवी सिंह गोला अपनी पत्नी के साथ काठमांडू घूमने गए थे। होटल में आग लगने पर दोनों ने पर्दे और चादरों की मदद से चौथी मंजिल से उतरने का प्रयास किया। इस दौरान उनकी पत्नी बुरी तरह घायल हो गईं और बाद में मौत हो गई। राजेश भी गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उन्हें समय पर मदद नहीं मिल सकी। यह नेपाल हिंसा में किसी भारतीय की पहली संभावित मौत मानी जा रही है।
सामने जला दी गाड़ियां, लोग छिपकर बचे
अन्य भारतीयों ने भी दर्दनाक अनुभव साझा किए। एक यात्री ने बताया कि उनकी गाड़ी को रोककर तोड़ा गया और फिर आग के हवाले कर दिया गया। कुछ लोगों को मजबूरी में स्थानीय घरों में छिपकर दो-तीन दिन बिताने पड़े।
भारत सरकार कर रही लगातार प्रयास
हिंसा से डरे-सहमे भारतीय नागरिक अब धीरे-धीरे स्वदेश लौट रहे हैं। लेकिन कई लोग अब भी काठमांडू में फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार लगातार नेपाल प्रशासन के संपर्क में है।
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