South Korea news:
सियोल, एजेंसियां। दक्षिण कोरिया की जांच एजेंसी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अपदस्थ राष्ट्रपति यून सुक योल ने सत्ता पर पकड़ बनाए रखने और अपने राजनीतिक विरोधियों को हटाने के उद्देश्य से एक साल से अधिक समय तक मार्शल लॉ लगाने की साजिश रची थी। स्वतंत्र वकील चो यून-सुक की अगुवाई में छह महीने तक चली जांच में यह निष्कर्ष सामने आया है।
दिसंबर 2024 में लगाया गया था मार्शल लॉ
जांच रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 में यून सुक योल ने मार्शल लॉ लागू किया था, हालांकि यह कुछ ही घंटों में समाप्त हो गया। बावजूद इसके, इस कदम ने उनके राजनीतिक करियर को गहरा झटका दिया और अंततः उन्हें पद से हटना पड़ा। फिलहाल यून जेल में हैं और देशद्रोह समेत कई गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं।
उत्तर कोरिया को लेकर तनाव बढ़ाने का आरोप
जांच में यह भी कहा गया है कि यून और उनके सैन्य सहयोगियों ने जानबूझकर उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के आदेश दिए, ताकि क्षेत्रीय तनाव बढ़े और मार्शल लॉ को जायज ठहराया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया की ओर से कोई गंभीर प्रतिक्रिया न मिलने के बावजूद इसे आंतरिक राजनीति में इस्तेमाल किया गया।
संसद को बताया ‘राष्ट्र-विरोधी ताकत’
चो यून-सुक ने बताया कि यून ने विपक्षी लिबरल पार्टी के नियंत्रण वाली संसद को ‘राष्ट्र-विरोधी ताकत’ करार देते हुए मार्शल लॉ लागू करने का ऐलान किया था। उनका दावा था कि देश की सुरक्षा के लिए इन ताकतों को तुरंत हटाना जरूरी है।
पहले से की जा रही थी तैयारी
जांच में खुलासा हुआ कि अक्टूबर 2023 से पहले ही मार्शल लॉ की योजना बनाई जा रही थी। इसके तहत शीर्ष सैन्य अधिकारियों में फेरबदल किया गया, करीबी लोगों को अहम पदों पर बैठाया गया और विरोध करने वाले रक्षा मंत्री को हटाया गया। सैन्य समर्थन हासिल करने के लिए निजी रात्रिभोज भी आयोजित किए गए।
यून का बचाव और मौन
यून सुक योल की ओर से जांच रिपोर्ट पर कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले वे दावा करते रहे हैं कि मार्शल लॉ विपक्ष की रुकावटों के चलते मजबूरी में लगाया गया था। हालांकि जांच एजेंसी के निष्कर्षों ने उनके इस दावे को कमजोर कर दिया है।








