Israel airstrikes on Tehran
तेहरान/ यरुशलम, एजेंसियां। ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब और तेज होता जा रहा है। युद्ध के सातवें दिन शुक्रवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान में इज़राइली हवाई हमलों ने भारी तबाही मचाई। शहर के जोम्हूरी एवेन्यू और आसपास के कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिसमें जामी बीआरटी स्टेशन के पास का इलाका भी शामिल है।
सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, हमले में एक घर पूरी तरह से तबाह हो गया और आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा।हमलों के बाद तेहरान के सेंट्रल और ईस्टर्न इलाकों में दहशत का माहौल है। सड़कें लगभग खाली नजर आईं क्योंकि लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों में छिपे रहे। इज़राइली सेना ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान के सरकारी और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं।
ईरान का जवाब और अमेरिका पर तीखा हमला
इस बीच ईरान ने भी इज़राइल और अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा ने नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के दौरान कहा कि यह संघर्ष ईरान के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। उन्होंने अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।खतीबजादा ने अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी रडार फारस की खाड़ी में क्या कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी बंद नहीं किया गया है और ईरान एक जिम्मेदार शक्ति के तौर पर काम कर रहा है।
अमेरिका की रणनीति और ट्रंप का बयान
अमेरिका ने भी इस संघर्ष को लेकर अपनी रणनीति साफ कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध के बावजूद अमेरिका में गैस की कीमतों को लेकर उन्हें ज्यादा चिंता नहीं है। उनका कहना है कि जैसे ही यह संघर्ष खत्म होगा, ऊर्जा की कीमतें तेजी से गिर जाएंगी। हालांकि युद्ध के कारण गैस की कीमतों में पहले ही करीब 20 सेंट प्रति गैलन यानी लगभग सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।इसी बीच अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने एक ईरानी ड्रोन कैरियर पर हमला किया है, जिससे उसमें आग लग गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरानी नौसेना के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
रूस और भारत की प्रतिक्रिया
युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए रूस ने यूरोप को चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ तो गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है। भारत के विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की और तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया।








