कीव, एजेंसियां। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की यूक्रेन के दुर्लभ खनिजों का सौदा करने को राजी हो गए हैं। वो डील पर साइन करने के लिए शुक्रवार को व्हाइट हाउस जा सकते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प पिछले 1 महीने से दबाव बना रहे थे, लेकिन तब जेलेंस्की ने कहा था कि वो अपने देश को नहीं बेचेंगे। यूक्रेन में करीब 11 ट्रिलियन डॉलर के दुर्लभ खनिज मौजूद हैं। ये रकम भारत की कुल इकोनॉमी से भी 3 गुना ज्यादा है।
यूक्रेन में ऐसे कौन-से दुर्लभ खनिज हैं, जिससे अमेरिका अरबों डॉलर कमाएगा, जेलेंस्की को कैसे घुटनों पर लाए ट्रम्प और क्या इस डील से थम जाएगी जंग, आपको बतायेंगे इस लेख में।
यूक्रेन में 100 से ज्यादा दुर्लभ खनिजों का भंडार है। इनमें 20 भंडार ऐसे हैं, जिन्हें अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने अमेरिका की इकोनॉमी ग्रोथ और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया है।
यूक्रेन में मौजूद कुछ प्रमुख खनिजः
- टाइटेनियम: यह चांदी जैसी दिखने वाला मैटेरियल जमीन के अंदर चट्टानों के टुकड़ों के रूप में पाया जाता है। टाइटेनियम लोहे से 50% और स्टील से 56% हल्का होता है, फिर भी दोनों धातुओं से कई गुना ज्यादा मजबूत होता है। टाइटेनियम को पिघलाने के लिए 2 हजार डिग्री सेल्सियस के तापमान की जरूरत होती है। यानी ये ज्यादा गर्मी सह सकता है। इसीलिए इसका इस्तेमाल विमानों से लेकर पावर स्टेशनों तक में होता है। रूस-यूक्रेन जंग की शुरुआत से पहले ग्लोबल टाइटेनियम उत्पादन में 7% हिस्सा यूक्रेन का था।
- लिथियम: ज्वालामुखी वाली चट्टानों और झरनों में पाया जाने वाला लिथियम हल्के सफेद रंग का होता है। यह दुनिया की सबसे हल्की धातु है। लिथियम को खुली हवा में नहीं रखा जाता, क्योंकि यह ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर फौरन आग पकड़ लेता है। इस वजह से लिथियम को तेल में डुबोकर रखा जाता है। लिथियम को एक चाकू से भी काटा जा सकता है, क्योंकि यह बहुत सॉफ्ट होता है। इसका इस्तेमाल बैटरियों को बनाने में होता है। यूरोप के कुल लिथियम भंडार का 33% हिस्सा यूक्रेन के पास है।
- यूरेनियम: यह एक रेडियोएक्टिव धातु है, जो चट्टानों और झरनों में पाई जाती है। यूरेनियम को दुनिया की सबसे खतरनाक धातु भी कहते हैं क्योंकि इसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में होता है। दुनियाभर के कुल यूरेनियम का 2% यूक्रेन में पाया जाता है।
- रेयर अर्थ मिनरल्स: यह 17 खनिजों का एक ग्रुप है, जो कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर मिलिट्री इक्विपमेंट तक में इस्तेमाल होता है। इसमें सेरियम, डिस्प्रोसियम, अर्बियम, यूरोपियम, गैडोलीनियम, होल्मियम, लैंथेनम, ल्यूटेटियम, नियोडिमियम, प्रेसियोडीमियम, प्रोमेथियम, समैरियम, स्कैंडियम, टेरबियम, थ्यूलियम, येटरबियम और इड्रियम शामिल हैं।
इसके अलावा यूक्रेन में ग्रेफाइट का भी बड़ा भंडार मौजूद है, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने में इस्तेमाल होता है।
इन दुर्लभ खनिजों से अमेरिका अरबों डॉलर कैसे कमाएगा?
ट्रम्प ने यूक्रेन के 50% दुर्लभ खनिजों पर कब्जा करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें ग्रेफाइट, यूरेनियम, टाइटेनियम, लिथियम समेत कई बेशकीमती और दुर्लभ खनिज शामिल हैं। इनका इस्तेमाल टेस्ला की कारों से स्पेसएक्स के रॉकेट तक, होवित्जर तोप से मोबाइल की चिप तक में होता है।
फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशन्स की सीनियर लेक्चरर जेसिका गेनॉयर के अनुसार, ट्रम्प का ध्यान यूक्रेन के दुर्लभ खनिजों पर बना हुआ है, क्योंकि ट्रम्प इससे अमेरिकी सुरक्षा और उद्योग को बढ़ाना चाहते हैं। ट्रम्प इन खनिजों की मदद से चीन को कड़ी टक्कर देना चाहते हैं।
रूस की क्या हो सकती है भूमिकाः
यूक्रेन के पास रेयर अर्थ मटेरियल के कई अहम भंडार हैं। हालांकि, जंग के बाद इनमें से कई इलाकों पर रूस का कब्जा है।
यूक्रेन के लुहांस्क, डोनेट्स्क, जपोरिजिया और खेरसॉन पर इस वक्त रूस का कब्जा है। इन प्रांतों में यूक्रेन के कुल खनिज भंडार का 53% हिस्सा है, जिसकी कीमत 6 ट्रिलियन पाउंड यानी करीब 660 लाख करोड़ रुपए हैं। इस पर पुतिन का सितंबर 2022 से कब्जा है।
25 फरवरी को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के साथ दुर्लभ खनिजों की डील करने की इच्छा जताई। पुतिन ने कहा कि रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए हम अमेरिका के साथ काम करने को तैयार हैं। रूसी कंपनियां रूस की जमीन से भी नेचुरल रिसोर्स एक्स्ट्रैक्ट कर सकती हैं। उनमें वो जमीन भी शामिल हैं, जो रूस ने यूक्रेन से हथियाई हैं।
इस पर ट्रम्प ने बयान देते हुए कहा- मैं रूस से खनिज खरीदना चाहूंगा। रूस के पास रेयर अर्थ मेटल्स का अच्छा भंडार है। वहां तेल और गैस भी बड़ी मात्रा में मौजूद है। यह रूस के लिए अच्छी बात है, क्योंकि इस पर हम समझौता कर सकते हैं।
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