Turkey distanced:
हमास,एजेंसियां। हमास और इजराइल के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष में अब एक बड़ा भूचाल आ गया है। कभी जिस तुर्की ने हमास के लड़ाकों को “भूमिपुत्र” कहकर खुला समर्थन दिया था, उसी तुर्की ने अब पूरी तरह पलटी मार ली है। राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोआन का रुख अब पूरी तरह बदल चुका है, और तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब द्वारा पेश उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसमें हमास को गाजा और फिलिस्तीन से पूरी तरह बाहर करने की बात कही गई है।
न्यूयॉर्क घोषणा पत्र
इस प्रस्ताव को “न्यूयॉर्क घोषणा पत्र” नाम दिया गया है, जिसकी बैठक 28 और 29 जुलाई को UN के न्यूयॉर्क ऑफिस में हुई। बैठक में फ्रांस, ब्रिटेन और 16 अरब देशों ने हिस्सा लिया और 2 राष्ट्र सिद्धांत के पक्ष में प्रस्ताव पास किया। इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि गाजा और वेस्ट बैंक में शांति तभी संभव है जब फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी जाए और हमास जैसे सशस्त्र संगठनों को वहां से बाहर किया जाए।
इस प्रस्ताव पर तुर्की, सऊदी अरब, जॉर्डन समेत कई अरब देशों ने समर्थन जताया है। यही नहीं, तुर्की ने अब हमास से हथियार डालने और गाजा से दूर रहने की मांग भी की है, जो उसके पहले के रुख से एक 180 नहीं, 360 डिग्री यूटर्न माना जा रहा है।
क्या है मामला ?
गौरतलब है कि मई 2024 में एर्दोआन ने हमास को “फिलिस्तीन के रक्षक” बताते हुए कहा था कि ये लड़ाके अपनी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, और उनकी तुलना तुर्की की आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले “कुवा-यी मिलिये” आंदोलन से की थी। तुर्की के विदेश मंत्री और खुफिया प्रमुख भी पहले हमास के साथ कई बार बैठकों में शामिल हो चुके हैं।
अब जब तुर्की ने हमास को छोड़कर अंतरराष्ट्रीय रुख के साथ खड़ा होने का फैसला किया है, तो उसकी विश्वसनीयता और दोहरे रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह रणनीतिक फैसला है या दबाव में लिया गया यू-टर्न – इस पर बहस तेज हो गई है।
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