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मुंबई, एजेंसियां। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुरुआती कारोबार में बाजार लाल निशान पर दिखाई दिया। शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 356.91 अंक या 0.45 प्रतिशत गिरकर 79,658.99 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी दबाव में दिखा और 148.15 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 24,617.75 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में यह गिरावट निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक परिस्थितियों के कारण देखी जा रही है।
पिछले कारोबारी दिन बाजार में आई थी जोरदार तेजी
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई थी। उस दिन 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 899.71 अंक की उछाल के साथ 80,015.90 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 285.40 अंक की बढ़त के साथ 24,765.90 के स्तर पर बंद हुआ था। गुरुवार की इस तेजी के बाद निवेशक शुक्रवार को मुनाफावसूली करते हुए दिखाई दिए, जिसका असर बाजार की शुरुआती गिरावट के रूप में देखने को मिला।
रुपये में मामूली मजबूती
इसी बीच भारतीय मुद्रा रुपये में हल्की मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे की बढ़त के साथ 91.62 पर पहुंच गया। रुपये में यह मजबूती अमेरिका द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट देने के फैसले के बाद देखने को मिली। इस फैसले से पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ कम हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के अनुसार पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़त हुई है, लेकिन यह बढ़ोतरी पिछले बड़े भू-राजनीतिक संकटों की तुलना में उतनी ज्यादा नहीं है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की संभावित अधिक आपूर्ति के कारण कीमतों में तेजी सीमित रही है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है, जिससे शेयर बाजार में फिर से मजबूती देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तब तक शेयर बाजार पर इसका बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि अगर कीमत 90 डॉलर से ऊपर जाकर 100 डॉलर के करीब पहुंचती है, तो इसका असर वैश्विक और भारतीय बाजारों पर दिखाई दे सकता है। इसलिए निवेशकों को आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।








