President Zelensky:
कीव, एजेंसियां। यूक्रेन में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। सैकड़ों प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार विरोधी कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। ये नया कानून दो प्रमुख संस्थाओं, नेशनल एंटी-करप्शन ब्यूरो (NABU) और स्पेशलाइज्ड एंटी-करप्शन प्रॉसिक्यूटर ऑफिस (SAPO) की स्वतंत्रता को खतरे में डालने वाला माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस कानून से भ्रष्टाचार विरोधी इन संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ जाएगा, जिससे राष्ट्रपति जेलेंस्की और उनके करीबी सहयोगियों को फायदा होगा।
विरोध क्यों हुआ?
यूक्रेनी संसद ने हाल ही में एक कानून पास किया, जिसके तहत NABU और SAPO पर प्रॉसिक्यूटर जनरल का नियंत्रण बढ़ जाएगा। आलोचकों का कहना है कि यह कदम इन संस्थाओं की स्वतंत्रता को खत्म कर देगा, और इससे सरकार को अपने करीबी लोगों के खिलाफ हो रही जांचों में हस्तक्षेप करने का मौका मिलेगा। जेलेंस्की ने इस कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, और अब इसे लागू किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा:
प्रदर्शन के दौरान लोग जेलेंस्की के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे। उनका कहना था कि सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने की बजाय अपने दोस्तों और करीबियों को बचाने में जुटी है। कई लोग यह मानते हैं कि रूस के खिलाफ चल रही जंग से ज्यादा यह कानून यूक्रेनी लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
यूरोपीय संघ की चिंता:
यूरोपीय संघ ने इस कानून को लेकर चिंता जताई है। यूरोपीय संघ की विस्तार आयुक्त मार्टा कोस ने कहा कि यह कदम यूक्रेन के यूरोपीय संघ में शामिल होने की दिशा में एक बड़ा उलटफेर हो सकता है। उन्होंने इसे यूक्रेन के लिए एक ‘पीछे की ओर बढ़ने वाला कदम’ बताया।
संगठनों की प्रतिक्रिया:
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भी इस कानून की आलोचना की है। संगठन ने जेलेंस्की से इस कानून को वीटो करने की अपील की है, वरना वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई में विश्वास खो देंगे। साथ ही, यह भी कहा कि यूक्रेन को अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि युद्ध के दौरान देश के पास बहुत कम संसाधन हैं।
प्रदर्शन का राजनीतिक असर:
यूक्रेन में युद्ध के दौरान हुए इस तरह के बड़े विरोध प्रदर्शन से जेलेंस्की के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जबकि आम तौर पर यूक्रेन में प्रदर्शन युद्ध के संदर्भ में होते हैं, इस बार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर इतना बड़ा विरोध हो रहा है। यह सरकार के लिए चिंता का विषय बन सकता है, खासकर जब वे यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
आखिर क्या होगा जेलेंस्की का अगला कदम?
हालांकि जेलेंस्की के दफ्तर ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विरोध और बढ़ता है, तो यह उनके प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। यूक्रेनी राष्ट्रपति के लिए अब यह महत्वपूर्ण है कि वह इस स्थिति से कैसे निपटते हैं, ताकि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर कोई असर न पड़े।
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