Champai Soren:
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने नगड़ी जमीन विवाद को लेकर मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने स्पष्ट कहा कि विरोध रिम्स-2 अस्पताल निर्माण का नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया का है जिसमें आदिवासी रैयतों की जमीन को जबरन छीना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न तो सही तरीके से मुआवजा दिया और न ही प्रभावित किसानों की राय ली।
चंपाई सोरेन ने चेतावनी दी कि जबरन भूमि अधिग्रहण करके विकास कार्य करना न केवल गलत है, बल्कि यह आदिवासी अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। उन्होंने ऐलान किया कि अक्टूबर माह में दुर्गा पूजा और काली पूजा के बीच नगड़ी क्षेत्र में एक भव्य “आदिवासी महा दरबार” आयोजित किया जाएगा, जिसमें करीब डेढ़ से दो लाख लोग शामिल होंगे।
सरकार की नीतियों और निर्णयों
इस दरबार में सरकार की नीतियों और निर्णयों पर जनता की अदालत लगाई जाएगी। साथ ही चंपाई ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष अब वोटर लिस्ट से विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रच रहा है, जिससे आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड के आदिवासी और मूलवासी अब अपनी जमीन, अधिकार और पहचान को बचाने के लिए निर्णायक संघर्ष करेंगे।
मंत्री इरफान अंसारी ने रिम्स-2 को लेकर कहा
दूसरी ओर, मंत्री इरफान अंसारी ने रिम्स-2 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए कहा कि इसका निर्माण नगड़ी की जमीन पर ही होगा। हालांकि चंपाई ने दो टूक कहा कि विकास तभी स्वीकार्य होगा जब उसमें किसी किसान को विस्थापित या पीड़ित न किया जाए। चंपाई के इस बयान से राज्य में आदिवासी मुद्दों पर नई बहस शुरू हो गई है।
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