France historic decision:
पेरिस, एजेंसियां। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए घोषणा की कि उनका देश आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में मान्यता देगा। इस फैसले से मध्य पूर्व में जारी विवादों और तनावों के बीच नई दिशा मिल सकती है। मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इस निर्णय की जानकारी दी और साथ ही फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को एक पत्र भी भेजा।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब कम से कम 142 देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता देने की योजना बनाई है। हालांकि, फ्रांस का यह निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक प्रमुख पश्चिमी देश है, जिसने अब तक फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी थी। यह कदम न केवल यूरोपीय देशों बल्कि समूचे पश्चिमी दुनिया के दृष्टिकोण में भी बदलाव को दर्शाता है।
इजरायल और अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया
फ्रांस के इस निर्णय पर इजरायल और अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे आतंकवाद को प्रोत्साहन देने वाला कदम बताया और कहा कि यह निर्णय फिलिस्तीन के आतंकवादी समूहों को इनाम देने जैसा है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे एक गैर-जिम्मेदार और अस्थिर करने वाला कदम करार दिया।
मध्य पूर्व में बदलाव की संभावना
फ्रांस के इस फैसले से यह सवाल उठता है कि क्या यह मध्य पूर्व के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ ला सकता है। फिलिस्तीन की स्वतंत्रता की मांग लंबे समय से चल रही है, और ऐसे में फ्रांस का यह कदम इस संघर्ष को नए सिरे से प्रमुख वैश्विक मंच पर ले जाएगा। वहीं, इजरायल इस कदम को अपनी सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा मानता है और ऐसे फैसलों के खिलाफ अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराता है।
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