Hemant Soren: ED के बाद अब CBI के जरिए हेमंत को घेरने की कोशिश!- आनंद कुमार

Anjali Kumari
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Hemant Soren

झारखंड की राजनीति एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां कानून, जांच एजेंसियां और सत्ता की राजनीति एक-दूसरे से गहराई से टकराती नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के 16 जनवरी को दिल्ली पहुंचने और 18 जनवरी से विदेश दौरे पर जाने की संभावित तारीखों के बीच सीबीआई चार्जशीट को लेकर चल रही चर्चाओं ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

सवाल यह नहीं है कि जांच क्यों हो रही है

सवाल यह है कि यही वक्त क्यों चुना गया?झारखंड में बीते कुछ वर्षों की घटनाओं पर नजर डालें तो एक पैटर्न उभरता दिखता है। पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जरिए मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश हुई। पूछताछ, समन, गिरफ्तारी और अंततः सत्ता से बाहर होने तक की प्रक्रिया झारखंड की राजनीति का हिस्सा बनी।
अब उसी कड़ी में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की सक्रियता ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह केवल कानूनी प्रक्रिया है या फिर राजनीतिक दबाव की अगली परत?

पूरा मामला साहिबगंज जिले के नींबू पहाड़ अवैध पत्थर खनन से जुड़ा हुआ है। ईडी की शुरुआती जांच में इस घोटाले की अनुमानित राशि 1000 से 1500 करोड़ रुपये बताई गई थी। वर्ष 2022 में शुरू हुई जांच ने राज्य की राजनीति को झकझोर दिया था।

इसी मामले में मुख्यमंत्री से पहली बार ईडी ने पूछताछ की थी। उनके विधायक प्रतिनिधि रहे पंकज मिश्रा की गिरफ्तारी, खनन विभाग के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और माफियाओं की कथित मिलीभगत के आरोपों ने इस केस को हाई-प्रोफाइल बना दिया।

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब साहिबगंज के निवासी विजय हासदा ने अवैध खनन को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

2023 में हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।
हालांकि बाद में विजय हासदा अपने बयान से मुकर गए और उन्होंने दबाव में बयान दिलवाए जाने का आरोप लगाया। बावजूद इसके, हाई कोर्ट ने न सिर्फ याचिका वापस लेने से इनकार किया, बल्कि सीबीआई को गवाहों के आचरण और जांच प्रक्रिया की भी पड़ताल करने का निर्देश दिया।

इसके खिलाफ राज्य सरकार और याचिकाकर्ता दोनों सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए सीबीआई को पूर्ण स्वतंत्र जांच की छूट दे दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह चर्चा तेज है कि सीबीआई जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक यह प्रक्रिया 18 जनवरी के आसपास पूरी हो सकती है। यही वह बिंदु है जहां मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाता है।

क्योंकि ठीक उसी समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में भाग लेने वाले हैं और इसके बाद उनका इंग्लैंड दौरा भी प्रस्तावित है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत सोरेन का अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि उन्होंने जांच एजेंसियों के दबाव में समझौते का रास्ता नहीं चुना। ईडी के मामले में उन्होंने सत्ता छोड़ना और जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन राजनीतिक रूप से झुकने से इनकार किया — और इसका फायदा उन्हें चुनावी नतीजों में मिला।इसीलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार सीबीआई को वही भूमिका दी जा रही है, जो पहले ईडी निभा चुकी है? या फिर यह केवल कानून की स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है?
फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि—
जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है
सुप्रीम कोर्ट का फैसला सीबीआई के पक्ष में है
और चार्जशीट की टाइमिंग राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है
आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया का सामान्य चरण है या फिर झारखंड की राजनीति में एक नए टकराव की शुरुआत

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