Jharkhand municipal elections
झारखंड में नगर निकाय चुनावों को लेकर सियासी दलों की बनाई गई रणनीति ज़मीनी हकीकत से टकराती दिख रही है। गैर-दलीय चुनाव के बावजूद दलों ने एक-एक प्रत्याशी को समर्थन देकर मैदान में उतारने की योजना बनाई थी, लेकिन समर्थन की घोषणा होते ही भीतरखाने बगावत फूट पड़ी। हालात ऐसे बन गए हैं कि समर्थित उम्मीदवारों के समानांतर पार्टी के ही नेता-कार्यकर्ता नामांकन दाखिल कर रहे हैं। नुकसान-नियंत्रण की कोशिशें बेअसर होती दिख रही हैं।
बीजेपी में सबसे ज्यादा खटरागः
सबसे अधिक उथल-पुथल भारतीय जनता पार्टी में दिखाई दे रही है। धनबाद में पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल का पार्टी छोड़कर झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल होना, वहीं रांची, मानगो, हजारीबाग, आदित्यपुर और मेदिनीनगर में समर्थित प्रत्याशियों के सामने पार्टी से जुड़े चेहरों का उतरना—ये संकेत दे रहे हैं कि संगठनात्मक अनुशासन पर दबाव बढ़ा है।
धनबाद: भाजपा में सबसे ज्यादा मारामारी
धनबाद में भाजपा समर्थित संजीव अग्रवाल 4 फरवरी को नामांकन करेंगे, लेकिन उनके अलावा झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह, भाजपा नेता मुकेश पांडेय, भृगुनाथ भगत और शांतनु चंद्रा भी पर्चा दाखिल करने की तैयारी में हैं। कांग्रेस के शमशेर आलम और रवि चौधरी ने नामांकन भरा है, जबकि झामुमो की नीलम मिश्रा भी मैदान में हैं। भाजपा छोड़ झामुमो में गए चंद्रशेखर अग्रवाल की एंट्री ने मुकाबला और जटिल कर दिया है।
रांची: समर्थित प्रत्याशी के साथ चार और नामांकन
रांची नगर निगम में भाजपा समर्थित रोशनी खलखो के नामांकन से पहले ही पार्टी के चार नेताओं—राजेंद्र मुंडा, सुजाता कच्छप, सुनील फकीरा और संजय कुमार टोप्पो—ने पर्चा भर दिया। सभी का तर्क है कि गैर-दलीय चुनाव में वे स्वतंत्र रूप से उतर रहे हैं। उधर झामुमो की रीना तिर्की ने भी नामांकन दाखिल किया है, जबकि पार्टी ने अब तक औपचारिक समर्थन की घोषणा नहीं की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से रमा खलखो एकमात्र प्रत्याशी हैं।
मानगो: परिवार और पार्टी—दोनों की परीक्षा
मानगो मेयर पद पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता के सामने कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता जेबा अख्तर उतरी हैं। भाजपा ने संध्या सिंह को समर्थन दिया है, लेकिन पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव का नामांकन करा दिया। जुगसलाई नगर परिषद में भी भाजपा नेता पप्पू सिंह ने अध्यक्ष पद पर पत्नी को उतारा है।
हजारीबाग: समर्थित बनाम पूर्व जिलाध्यक्ष
हजारीबाग नगर निगम में भाजपा समर्थित सुदेश चंद्रवंशी के सामने पूर्व जिला अध्यक्ष टुन्नू गोप उतर चुके हैं। कांग्रेस और झामुमो से यहां अब तक नामांकन नहीं हुआ है, लेकिन अंदरूनी खींचतान ने मुकाबले की दिशा तय कर दी है।
आदित्यपुर–सरायकेला: चंपाई के करीबी मैदान में
आदित्यपुर में भाजपा समर्थित प्रभाषिणी कंडुलिया के सामने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की करीबी सावित्री लियांगी ने पर्चा भरा है। सरायकेला नगर परिषद में भी भाजपा समर्थित सुमित चौधरी के विरुद्ध सानंद कुमार आचार्या मैदान में हैं, जिन्हें भी चंपाई का नजदीकी माना जाता है। इन दो सीटों पर घटनाक्रम ने भाजपा की रणनीति पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।
मेदिनीनगर: कई चेहरे, बिखरा समर्थन
मेदिनीनगर में भाजपा समर्थित अरुणा शंकर के विरुद्ध पूर्व जिला अध्यक्ष परशुराम ओझा की पत्नी जानकी ओझा, पूर्व डिप्टी मेयर मंगल सिंह की पत्नी रिंकू सिंह और मीना कुमारी ने नामांकन किया है। कांग्रेस से नम्रता त्रिपाठी और झामुमो समर्थित पूनम सिंह भी मुकाबले में हैं।
सियासी संकेत
गैर-दलीय चुनाव की आड़ में दलों के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। समर्थित प्रत्याशी होने के बावजूद समानांतर नामांकन से वोटों के बंटवारे का जोखिम बढ़ा है। आदित्यपुर और सरायकेला में चंपाई सोरेन के नजदीकी चेहरों का उतरना संकेत देता है कि आंतरिक मतभेद अब स्थानीय चुनावों के नतीजों को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
